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अब वेल्लोर में नहीं होगी रहने की परेशानी? झारखंड भवन बनाने की तैयारी

झारखंड से इलाज कराने तमिलनाडु के वेल्लोर जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए राहत भरी खबर है. वेल्लोर में झारखंड भवन बनाने की पहल से दूसरे राज्य में इलाज के दौरान रहने की परेशानी कम होने की उम्मीद है. इस भवन से जरूरतमंद मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को सहूलियत मिल सकती है. खासकर लंबी अवधि तक इलाज कराने के लिए वेल्लोर जाने वाले लोगों को इससे फायदा होने की संभावना है.
 
JHARKHAND

Ranchi:  बेहतर इलाज की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले झारखंड के मरीजों और उनके परिजनों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। तमिलनाडु के वेल्लोर में झारखंड भवन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य सरकार को वहां 1.25 एकड़ जमीन मिल गई है। अब जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस भवन के बनने से गंभीर बीमारियों का इलाज कराने वेल्लोर जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को ठहरने के लिए एक सुविधाजनक विकल्प मिल सकेगा।

झारखंड सरकार की योजना केवल वेल्लोर तक सीमित नहीं है। मुंबई और हैदराबाद में भी झारखंड भवन की सुविधा विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दूसरे राज्यों में इलाज कराने जाने वाले मरीजों को सहूलियत देना और उनके परिजनों पर रहने के खर्च का बोझ कम करना है।

वेल्लोर में जमीन मिलने से आगे बढ़ी योजना

तमिलनाडु का वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए देशभर में जाना जाता है। झारखंड से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज कराने पहुंचते हैं। कई मरीजों को जांच, ऑपरेशन और उसके बाद की देखभाल के लिए लंबे समय तक वेल्लोर में रुकना पड़ता है।

ऐसी स्थिति में मरीज के साथ आए परिजनों को होटल, लॉज या निजी आवास में रहने के लिए काफी खर्च करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इलाज के साथ रहने और खाने-पीने की व्यवस्था करना अतिरिक्त चुनौती बन जाता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने करीब दो वर्ष पहले ही भवन निर्माण विभाग को वेल्लोर में झारखंड भवन बनाने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया था। अब 1.25 एकड़ जमीन उपलब्ध होने के बाद इस योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि, निर्माण शुरू होने से पहले आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी।

मरीजों के परिजनों को मिलेगी ठहरने की सुविधा

झारखंड भवन का प्रमुख उद्देश्य राज्य से बाहर इलाज कराने जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सहायता उपलब्ध कराना है। सरकारी भवन तैयार होने के बाद उन्हें ठहरने के लिए अपेक्षाकृत किफायती विकल्प मिल सकता है।

लंबे समय तक अस्पताल में इलाज चलने की स्थिति में परिवारों का खर्च लगातार बढ़ता है। ऐसे में ठहरने की सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भवन में रहने की व्यवस्था, शुल्क, क्षमता और पात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी वास्तविक सुविधाओं का आकलन किया जा सकेगा।

मुंबई के वाशी में 136 करोड़ रुपये से बनेगा भवन

वेल्लोर के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी झारखंड भवन बनाने की तैयारी चल रही है। नवी मुंबई के वाशी इलाके में आधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन के निर्माण पर करीब 136 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।

इसके लिए सरकार को सेक्टर-30ए में प्लॉट नंबर 2सी पर 63.65 डिसमिल जमीन मिली है। निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ जरूरी मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। आवश्यक क्लीयरेंस मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।

मुंबई में झारखंड भवन बनने से वहां इलाज, सरकारी कामकाज या अन्य जरूरी कार्यों के लिए जाने वाले राज्य के लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

हैदराबाद में भी जमीन तलाश रही सरकार

झारखंड सरकार हैदराबाद में भी भवन बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। इसके लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से बातचीत की गई है। उन्होंने झारखंड सरकार को जमीन उपलब्ध कराने को लेकर आश्वासन दिया है।

सरकार हैदराबाद के गाचीबावली इलाके में एआईजी अस्पताल के आसपास एक से डेढ़ एकड़ जमीन की तलाश कर रही है। झारखंड से बड़ी संख्या में मरीज इस अस्पताल में इलाज कराने पहुंचते हैं। इसके अलावा, हैदराबाद के आईटी और अन्य क्षेत्रों में भी राज्य के कई युवा काम करते हैं।

दूसरे राज्यों में झारखंड भवन बनाने पर जोर

वेल्लोर, मुंबई और हैदराबाद में झारखंड भवन बनाने की पहल राज्य के लोगों को दूसरे राज्यों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यापक योजना का हिस्सा है। दिल्ली में झारखंड भवन का निर्माण पहले ही हो चुका है। अब अन्य प्रमुख शहरों में भी ऐसी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

वेल्लोर में जमीन मिलने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण जरूरी मंजूरियां प्राप्त करना और निर्माण शुरू करना होगा। भवन तैयार होने पर उन परिवारों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें इलाज के लिए लंबे समय तक अपने घर से दूर रहना पड़ता है।