हजारीबाग की महिलाएं किसानों के लिए बना रहीं जैविक खाद- पौधों के हर रोग का देसी इलाज!
- ग्रामीण महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर जैविक या कंपोस्ट खाद तैयार करना शुरू किया है.
- इस खाद में गोबर, पत्तियाँ, घास, खेतों का बायोमास आदि शामिल होते हैं जो प्राकृतिक तरीके से सड़कर मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करते हैं.
Hazaribagh: हजारीबाग और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में महिला किसान पिछले कुछ समय से जैविक खेती और जैविक खाद के उत्पादन की दिशा में अग्रसर हैं. भारत समेत झारखंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने की नीतियाँ पहले से मौजूद हैं, और इस दिशा में राज्य सरकार तथा कृषि विभाग प्रशिक्षण व समर्थन प्रदान कर रहे हैं, जिससे महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि हो रही है. जैविक खाद (जीव/कंपोस्ट खाद) मिट्टी की सेहत और फसल के स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, रसायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करता है और पर्यावरण को सुरक्षित रखता है.

उन्नत खेती के लिए जैविक खाद बेहद महत्व रखता है. हजारीबाग की चुरचू प्रखंड की महिलाएं इन दिनों अपने गांव के किसानों के लिए जैविक खाद तैयार कर रही हैं. साथ ही महिलाएं अपने खेत में जैविक खाद का उपयोग भी कर रही हैं ताकि बंपर खेती हो. इन दिनों महिलाएं हर एक क्षेत्र में अपना परचम लहलहा रही हैं. हजारीबाग के सुदूरवर्ती चुरचू प्रखंड की महिलाएं पलाश से जुड़कर स्थानीय किसानों के लिए जैविक खाद तैयार कर रही हैं ताकि बंपर खेती हो.
महिलाओं का कहना है कि जैविक खाद तैयार कर पहले गांव की ही महिला किसानों को उपलब्ध कराया गया. महिला किसानों ने जब उपयोग में लाया तो बेहतर परिणाम सामने आया. अब गांव के किसानों के लिए जैविक खाद तैयार किया जा रहा है. जो बेहद कम मुनाफे में किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है.
आमतौर पर किसान जैविक खाद नहीं बनाते हैं. क्योंकि इसे तैयार करने में काफी अधिक समय लगता है. किसान के पास समय का अभाव भी रहता है. इसे देखते हुए महिलाओं ने कहा कि क्यों ना गांव के किसानों के लिए ही जैविक खाद तैयार किया जाए. गांव की महिलाएं जैविक खाद बनाकर बाजार में उपलब्ध करा रही हैं. साथ ही खुद के खेत में भी उपयोग में ला रही हैं.

महिला किसानों का कहना है कि हाल के दिनों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाया है. रासायनिक कई बीमारियों का कारण बन जाता है. किसान रासायनिक खाद का उपयोग करते हैं और आम जनता उस उत्पाद को खाते हैं. रासायनिक खाद से किसान का भी स्वास्थ्य प्रभावित होता है. जो उत्पाद खा रहे हैं उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है.
इसे देखते हुए जैविक खाद तैयार किया जा रहा है. महिलाओं का कहना है कि हमेशा टीवी और मोबाइल पर यह बातें आती हैं कि रासायनिक खाद का उपयोग करने से कैंसर जैसी घातक बीमारी होती है. इसे देखते हुए गांव के किसानों के लिए जैविक खाद तैयार कर रहे हैं.
महिला किसानों ने नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, खट्टा मीठा समेत कई तरह के जैविक खाद तैयार कर रही हैं. इसके साथ ही बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए भी आहार तैयार किया गया है.

- नीमास्त्रः जो नीम के पत्ते गोबर और सफेद मिट्टी से तैयार किया जाता है. कीटनाशक के रूप में इसे उपयोग मैं लाया जाता है. महिलाओं का कहना है कि 10 दिन के अंतराल में अगर पौधों में डाला जाए तो पौधों में कीट नहीं लगेगा.
- ब्रह्मास्त्रः यह जैविक खाद घरेलू सामान से तैयार किया जाता है. जिसमें साग सब्जी को गलाकर तैयार किया जाता है. इसका उपयोग पौधों के उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के उपयोग में लाया जाता है.
- खट्टा मीठा गोलः जिस पौधे में फूल नहीं होता है या पौधे से फूल गिर जाता है. वैसे पौधों के लिए इसे तैयार किया गया है. जो कई तरह के वनस्पति से बनाया गया है.
- बकरी पाउडरः बकरी पालक किसानों के लिए महिलाओं ने बकरी चारा तैयार किया है. जिसमें मक्का, ज्वार, बाजरा, गुड़, गेहूं, चोकर समेत कई तरह के मिनरल्स पाउडर मिलाए गए हैं. महिलाओं का कहना है कि बकरी के लिए यह पाउडर रामबाण है.







