झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के खर्चे की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती...इस बार चुनाव आयोग पूरी तरह सख्त...
Ranchi: वहीं दस लाख से कम जनसंख्या वाले क्षेत्र के महापौर/अध्यक्ष के लिए 15 लाख रुपये और वार्ड पार्षद के लिए 3 लाख रुपया निर्धारित किया गया है.
Feb 10, 2026, 15:39 IST
Ranchi: नगर निकाय चुनाव में धन-बल के आधार पर चुनाव जीतने की चाहत रखनेवाले प्रत्याशियों के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए निर्वाचन आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है. पिछले चुनाव के अनुभव को देखते हुए आयोग ने इस बार के चुनाव में नजर रखने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं.
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी 48 शहरी निकायों में व्यय पर्यवेक्षक के साथ साथ सामान्य पर्यवेक्षकों की तैनाती की है जो प्रत्याशियों के खर्चे और गतिविधि पर नजर रख रही है. इसके अलावा प्रत्याशियों और उनके समर्थकों द्वारा चुनाव के दौरान गैर कानूनी हड़कत किए जाने पर सख्त कारवाई करने की तैयारी की गई है.
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद के अनुसार स्वच्छ एवं निष्पक्ष मतदान कराना आयोग के प्राथमिकता में है. ऐसे में प्रत्याशियों से अपेक्षा की जाती है कि जारी दिशानिर्देश के तहत ही कार्य करें. उन्होंने कहा कि हर जिले में नजर रखने के लिए कंट्रोल रुम बनाया गया है जिसमें अधिकारियों को तैनात किया गया है.
नगर निकाय चुनाव में 10 लाख से अधिक वाले जनसंख्या क्षेत्र के महापौर/अध्यक्ष के लिए अधिकतम 25 लाख रुपए निर्वाचन की सीमा रखी गई है. वहीं वार्ड पार्षद के लिए 5 लाख निर्धारित किए गए हैं.
वहीं दस लाख से कम जनसंख्या वाले क्षेत्र के महापौर/अध्यक्ष के लिए 15 लाख रुपये और वार्ड पार्षद के लिए 3 लाख रुपया निर्धारित किया गया है.
इस सीमा के अंदर ही प्रत्याशी खर्च करेंगे. चुनाव आयोग के निर्देश पर इसके लिए हर प्रत्याशियों को बैंक एकाउंट खोला गया है. साथ ही हर प्रत्याशियों को प्रत्येक दिन खर्च का ब्यौरा संबंधित नगर निकाय क्षेत्र में जमा करना अनिवार्य किया गया है.
चुनाव आयोग के सचिव ने कहा कि चुनाव के दौरान होनेवाले सामग्री के व्यय के लिए खर्च का दर तय है. उसी के अनुसार व्यय पंजी में दाखिल कर प्रत्याशी को समेकित रुप से चुनाव के बाद दाखिल करना अनिवार्य होगा.
बता दें कि पिछले नगर निकाय चुनाव में मतदान से ठीक पहले पैसों के लेनदेन करते एक प्रत्याशी के पाये जाने पर चुनाव को स्थगित करना पड़ा था. ऐसे में आयोग द्वारा इस बार फूंक फूंककर कदम उठाया जा रहा है जिससे कोई गड़बड़ी ना हो.







