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सोमनाथ पर हमले के 1000 साल: पीएम मोदी का तीखा ब्लॉग, सरदार पटेल को श्रद्धांजलि, नेहरू पर परोक्ष निशाना

 
सोमनाथ पर हमले के 1000 साल: पीएम मोदी का तीखा ब्लॉग, सरदार पटेल को श्रद्धांजलि, नेहरू पर परोक्ष निशाना

New Delhi: सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनी के आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भों से भरा ब्लॉग लिखा है। इस लेख में उन्होंने सोमनाथ को हिंदू आस्था, आत्मबल और पुनर्जागरण का प्रतीक बताया, साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को दिया। पीएम मोदी ने इस क्रम में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रुख का भी उल्लेख करते हुए परोक्ष आलोचना की है।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र संकल्प सरदार पटेल ने लिया था। वर्ष 1947 में दीवाली के दौरान सोमनाथ यात्रा ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था। उसी समय उन्होंने यह निश्चय किया कि यहीं भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। यह सपना 11 मई 1951 को साकार हुआ, जब मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। उस ऐतिहासिक मौके पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद मौजूद थे।

पीएम मोदी ने यह भी लिखा कि सरदार पटेल उस दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका संकल्प राष्ट्र के सामने मूर्त रूप में खड़ा था। उन्होंने उल्लेख किया कि उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस आयोजन को लेकर सहज नहीं थे और वे नहीं चाहते थे कि राष्ट्रपति या मंत्री इसमें शामिल हों, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि इससे भारत की छवि पर असर पड़ेगा। इसके बावजूद डॉ. राजेंद्र प्रसाद अपने निर्णय पर अडिग रहे और वह क्षण इतिहास में दर्ज हो गया।

प्रधानमंत्री ने के.एम. मुंशी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने लिखा कि सोमनाथ मंदिर का उल्लेख मुंशी जी के बिना अधूरा है। उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’ का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह पुस्तक भारत की उस सभ्यतागत चेतना को दर्शाती है, जो विनाश के बाद भी जीवित रहती है। उन्होंने गीता के श्लोक “नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः” का उल्लेख करते हुए कहा कि सोमनाथ का भौतिक स्वरूप भले नष्ट हुआ हो, लेकिन उसकी आत्मा अमर रही।

ब्लॉग में पीएम मोदी ने वर्तमान भारत की वैश्विक भूमिका पर भी बात की। उन्होंने लिखा कि आज दुनिया भारत को आशा और विश्वास की नजर से देख रही है। भारत के युवा, उसकी संस्कृति, कला, संगीत, योग और आयुर्वेद वैश्विक पहचान बना रहे हैं। कई वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।

प्रधानमंत्री ने अंत में लिखा कि 1026 के आक्रमण के एक हजार साल बाद भी 2026 में सोमनाथ का समुद्र उसी गर्जना के साथ उसकी गाथा सुनाता है। आक्रमणकारी इतिहास की धूल बन चुके हैं, जबकि सोमनाथ आज भी आस्था और आशा का प्रकाश फैलाता हुआ खड़ा है। यह मंदिर सिखाता है कि घृणा और कट्टरता विनाश ला सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की असीम शक्ति होती है।