बाढ़ के बीच फर्रूखाबाद में योगी सरकार की ‘फुल प्रूफ’ तैयारी, 191 नावें और 53 गोताखोर तैनात
UP News: गंगा और रामगंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच फर्रूखाबाद जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले की सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसीलों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री, भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ सुरक्षित आश्रय देने की व्यवस्था की गई है। खास बात यह है कि मॉडल बाढ़ शरणालयों में बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लास, मनोरंजन कक्ष और खेलकूद की सुविधाएं भी तैयार की गई हैं।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है। जिन परिवारों के मकान बाढ़ के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
63 गांवों पर प्रशासन की सीधी नजर
फर्रूखाबाद की तीनों तहसीलों के 63 गांवों में आबादी और कृषि क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हैं। 19 अगस्त को नरोरा बैराज से गंगा में 1,15,137 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया, जो 137.10 मीटर के खतरे के निशान से नीचे है। रामगंगा में भी 75,445 क्यूसेक पानी पास हुआ।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिले में 52 बाढ़ चौकियां और 24 अस्थायी बाढ़ शरणालय सक्रिय किए गए हैं। सदर तहसील में पांच, कायमगंज में 15 और अमृतपुर में 33 बाढ़ चौकियां संचालित हैं।
बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
बाढ़ शरणालयों में रह रहे बच्चों की पढ़ाई और मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया है। तीनों तहसीलों में एक-एक मॉडल शरणालय बनाया गया है, जहां स्मार्ट क्लास, एंटरटेनमेंट रूम और खेलकूद की व्यवस्था की गई है। इससे राहत शिविरों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई का सिलसिला जारी रखने के साथ उनके मानसिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
191 नावें और 53 गोताखोर तैयार
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले में 191 निजी नाव और नाविकों के साथ 53 गोताखोर तैनात किए गए हैं। बचाव टीमों को सेफ्टी किट, लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग, सर्च लाइट, हेलमेट, रेनकोट, मेगाफोन और रस्सियों समेत जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
कलेक्ट्रेट, जिलाधिकारी कैंप कार्यालय और सिंचाई विभाग में 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित किए जा रहे हैं, जहां से जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।
144 मेडिकल कैंप, 8 हजार से ज्यादा लोगों का इलाज
बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जिले में 17 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं और अब तक 144 मेडिकल कैंप लगाए जा चुके हैं। इन शिविरों में 8,073 लोगों का उपचार किया गया है। इसके अलावा 10,413 ओआरएस पैकेट और 9,063 क्लोरीन टैबलेट वितरित की गई हैं।
पशुओं की देखभाल के लिए छह पशु चिकित्सा टीमें, 14 अस्थायी पशु शरणालय और 54 पशु शिविर संचालित हैं। अब तक 3,273 पशुओं का उपचार और 7,237 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। पशुओं के लिए 120 क्विंटल भूसा भी वितरित किया गया है।
10 हजार से ज्यादा परिवारों को सूखा राशन
राहत अभियान के तहत 10,621 परिवारों को सूखे खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं। 661 विस्थापित लोगों को बाढ़ शरणालयों में रखा गया है, जहां उन्हें नियमित रूप से नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 7,939 पके भोजन के पैकेट बांटे जा चुके हैं।
बाढ़ में घर गंवाने वालों को मिलेगा नया सहारा
प्रशासन ने राहत के साथ पुनर्वास की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया गांव के 25 परिवारों को आवासीय पट्टे दिए जा चुके हैं, जबकि 21 परिवारों के खातों में पट्टे की धनराशि भी उपलब्ध कराई गई है।
जिले में पूरी तरह क्षतिग्रस्त 21 मकानों के लिए 25.20 लाख रुपये गृह अनुदान के रूप में दिए जा चुके हैं। पानी उतरने के बाद फसलों का सर्वे कर पात्र किसानों को कृषि निवेश अनुदान भी दिया जाएगा।
किसानों को जलभराव सहने वाली धान की किस्म
बाढ़ और जलभराव से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए कृषि विभाग ने आईआर-64 सब-1 जैसी धान की प्रजाति उपलब्ध कराई है। यह किस्म करीब 14 दिन तक जलभराव के बाद भी दोबारा सामान्य स्थिति में आने में सक्षम बताई गई है।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में जिला प्रशासन राहत, बचाव और पुनर्वास के कार्यों को विभिन्न विभागों के समन्वय से आगे बढ़ा रहा है। एनडीआरएफ, फ्लड पीएसी, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, सिंचाई और अन्य विभागों के सहयोग से मॉकड्रिल, बाढ़ राहत चौपाल और स्कूल सेफ्टी कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। प्रशासन का जोर है कि बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद मिले और स्थिति सामान्य होने के बाद उनके पुनर्वास में भी किसी तरह की परेशानी न हो।







