CM राहत कोष से 5 साल में 2.44 लाख लोगों को मिली मदद, 4,324 करोड़ रुपये की सहायता; लाभार्थियों की संख्या 4.5 गुना बढ़ी
UP News: आर्थिक तंगी, गंभीर बीमारी या किसी विपरीत परिस्थिति में फंसे जरूरतमंदों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष लगातार मदद का बड़ा जरिया बन रहा है। पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस योजना के तहत 2,44,263 लोगों को कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। खास बात यह है कि राहत पाने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है और यह आंकड़ा पांच साल में करीब 4.5 गुना बढ़ गया।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां 16,640 लाभार्थियों को सहायता मिली थी, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 74,531 हो गई। यानी हर साल अधिक संख्या में जरूरतमंदों तक आर्थिक सहायता पहुंची।
2025-26 में रिकॉर्ड 74 हजार से ज्यादा लाभार्थी
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021-22 में मुख्यमंत्री राहत कोष से 289.71 करोड़ रुपये की सहायता दी गई और 16,640 लोग लाभान्वित हुए। इसके अगले वर्ष 2022-23 में 31,745 लाभार्थियों को 572.97 करोड़ रुपये की मदद मिली।
वर्ष 2023-24 में सहायता का दायरा और बढ़ा। इस दौरान 54,473 लाभार्थियों को 1,008.50 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। 2024-25 में सहायता राशि बढ़कर 1,344.94 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो इन पांच वर्षों में सबसे अधिक रही। इस वर्ष 66,874 लोगों को मदद मिली और प्रति लाभार्थी औसत सहायता करीब 2.01 लाख रुपये रही।
वहीं 2025-26 में सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, लेकिन लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
सहायता राशि घटी, लेकिन ज्यादा लोगों तक पहुंची मदद
2025-26 में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में सहायता राशि में करीब 17.6 फीसदी की कमी आई। इसके बावजूद लाभार्थियों की संख्या 11.4 फीसदी बढ़ गई। यानी कुल सहायता राशि कम होने के बावजूद ज्यादा जरूरतमंदों को राहत मिली।
आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री राहत कोष का लाभ लगातार अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया जारी रही है।
लखनऊ से गोरखपुर तक, सभी मंडलों में पहुंची राहत
उपलब्ध मंडलवार आंकड़ों में राहत की व्यापक पहुंच दिखाई देती है। लखनऊ मंडल में 19,507, गोरखपुर में 13,621, प्रयागराज में 12,019, अयोध्या में 10,427, वाराणसी में 9,364 और कानपुर मंडल में 8,433 लाभार्थियों को सहायता मिली।
इसके अलावा देवीपाटन मंडल में 7,201, आजमगढ़ में 6,760, बस्ती में 3,740 और मिर्जापुर में 3,335 लाभार्थी दर्ज किए गए हैं। झांसी में 2,263, चित्रकूट में 1,894, आगरा में 1,617, मुरादाबाद में 1,441 और मेरठ में 1,308 लाभार्थियों तक सहायता पहुंची।
इन आंकड़ों से साफ है कि राहत का दायरा सिर्फ बड़े शहरों या प्रमुख मंडलों तक सीमित नहीं रहा।
जिला स्तर पर भी दिखी व्यापक पहुंच
जिला स्तर पर सबसे ज्यादा लाभार्थियों में लखनऊ 7,491, प्रयागराज 6,572, गोरखपुर 5,463 और कानपुर नगर 4,890 शामिल हैं।
इसके बाद गोंडा में 3,647, आजमगढ़ में 3,417, प्रतापगढ़ में 3,240, वाराणसी में 3,220, जौनपुर में 3,219 और सीतापुर में 3,192 लोगों को सहायता मिली।
कुशीनगर में 3,179, देवरिया में 2,914, बाराबंकी में 2,911, रायबरेली में 2,701 और अयोध्या में 2,246 लाभार्थी दर्ज किए गए हैं।
जरूरतमंदों को आर्थिक सहारा देने पर जोर
मुख्यमंत्री राहत कोष के पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक संकट और गंभीर परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों तक सहायता पहुंचाने का दायरा लगातार बढ़ा है। इस अवधि में 2.44 लाख से ज्यादा लोगों को 4,324 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिलना इसकी व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
मंडल और जिला स्तर के आंकड़ों में भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लाभार्थियों की मौजूदगी सामने आती है। इससे संकेत मिलता है कि राहत कोष के जरिए जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहारा देने की प्रक्रिया को लगातार विस्तार दिया गया है।







