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वाराणसी को मिलने जा रहा 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, योगी कैबिनेट से मिली मंजूरी

 
वाराणसी को मिलने जा रहा 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, योगी कैबिनेट से मिली मंजूरी

National News: उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को जल्द ही 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मिलने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद वाराणसी स्थित श्री शिवप्रसाद गुप्ता (एसएसपीजी) मंडलीय चिकित्सालय को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 500 शैय्या युक्त सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में बदला जाएगा। यह परियोजना न केवल वाराणसी बल्कि पूरे पूर्वांचल के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी।

पूर्वांचल को मिलेगा बड़ा स्वास्थ्य संबल

इस अस्पताल के बनने से वाराणसी के साथ-साथ आसपास के जिलों के लाखों मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब मरीजों को बड़े महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

जर्जर भवन तोड़कर बनेगा आधुनिक अस्पताल

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि अस्पताल के निर्माण के लिए एसएसपीजी परिसर में स्थित 11 जर्जर भवनों को तोड़ा जाएगा, जिसकी स्वीकृति कैबिनेट ने दे दी है। इन भवनों को हटाने पर करीब 11.58 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

315 करोड़ से ज्यादा की परियोजना, केंद्र-राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने जानकारी दी कि इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कुल 315.48 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है।
इसमें से 60 प्रतिशत राशि (189.28 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार देगी, जबकि 40 प्रतिशत (126.19 करोड़ रुपये) का खर्च उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी।

चार साल में तैयार होगा अस्पताल

सरकार के मुताबिक यह अत्याधुनिक अस्पताल अगले चार वर्षों में बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद पूर्वांचल के लोगों को उच्चस्तरीय इलाज, विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक मेडिकल सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी।

वाराणसी में बनने वाला यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होने की उम्मीद है और पूर्वांचल को चिकित्सा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।