केपटाउन में होगा 69वां CPA सम्मेलन, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार जलवायु अनुकूलन पर रखेंगे भारत का पक्ष
Newshaat Desk: दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में 13 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) सम्मेलन में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। सम्मेलन में वह जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों और उनसे निपटने में संसद की भूमिका पर अपने विचार रखेंगे।
सम्मेलन की तैयारियों और भारतीय प्रतिनिधिमंडल की रणनीति को लेकर मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार समेत भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया।
अलग-अलग विषयों पर भारतीय प्रतिनिधि रखेंगे अपनी बात
बैठक में CPA सम्मेलन के दौरान होने वाले विभिन्न सत्रों, उनके विषयों और सम्मेलन की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करने हैं।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार “जलवायु अनुकूलन और लचीलापन बढ़ाने में संसदीय नेतृत्व की भूमिका” विषय पर संबोधन देंगे। उनका वक्तव्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और भविष्य के लिए अधिक सक्षम व्यवस्था तैयार करने में संसदीय नेतृत्व की भूमिका पर केंद्रित रहेगा।
विदेश सचिव समेत कई अधिकारियों ने दी जानकारी
बैठक के दौरान भारत सरकार के विदेश सचिव समेत विभिन्न विभागों के सचिवों ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को सम्मेलन के लिए निर्धारित छह प्रमुख विषयों की विस्तृत जानकारी दी।
अधिकारियों ने सम्मेलन के अलग-अलग सत्रों में भारत का पक्ष प्रभावी तरीके से रखने को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ चर्चा की। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत किया जाए।
हरिवंश करेंगे भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
69वें CPA सम्मेलन में भारत की ओर से जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश करेंगे। सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों की संसदों से जुड़े प्रतिनिधि विभिन्न वैश्विक और संसदीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
केपटाउन में होने वाला यह सम्मेलन संसदीय लोकतंत्र, सुशासन और वैश्विक चुनौतियों पर विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच होगा। इसमें जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिए संसदीय संस्थाओं की भूमिका भी प्रमुख चर्चा का विषय रहेगी।p







