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‘बंगाल में 45 दिन में 7वां वेतन आयोग लागू होगा’: परिवर्तन यात्रा में अमित शाह का बड़ा ऐलान

 
‘बंगाल में 45 दिन में 7वां वेतन आयोग लागू होगा’: परिवर्तन यात्रा में अमित शाह का बड़ा ऐलान
Political news: पश्चिम बंगाल में चल रही परिवर्तन यात्रा के दौरान भगवतीपुर (गोपीनाथपुर मौजा), रैदिघी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विशाल जनसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रोजगार, वेतन आयोग और प्रशासनिक सुधार को लेकर कई बड़े वादे किए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो 45 दिनों के भीतर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर दी जाएंगी।

“सरकारी खाली पद भरेंगे, युवाओं को 5 साल की छूट”

अमित शाह ने घोषणा की कि 26 दिसंबर तक राज्य के सभी रिक्त सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। भर्ती में देरी से प्रभावित युवाओं को सरकारी नौकरियों में अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की विशेष छूट देने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी, ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो सके।

शिक्षकों के मुद्दे पर समाधान का वादा

शिक्षक भर्ती विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 26 हजार शिक्षकों से जुड़े मामले का कानूनी और पारदर्शी समाधान निकाला जाएगा। इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाएंगे।

महिलाओं के लिए 5700 करोड़ का प्रावधान

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए अमित शाह ने 5,700 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान की घोषणा की। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए अलग योजनाएं लाई जाएंगी।

भ्रष्टाचार और माफिया पर सख्ती का संदेश

उन्होंने साफ कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराधियों और बाहरी माफिया के प्रभाव को खत्म करने की बात भी दोहराई। अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में रहकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

‘परिवर्तन’ का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए अमित शाह ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने पर बंगाल में पारदर्शी शासन, मजबूत कानून-व्यवस्था और रोजगार के नए अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे।
उन्होंने जनता से अपील की कि वे राज्य के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य के लिए बदलाव का समर्थन करें।

परिवर्तन यात्रा के मंच से किए गए इन ऐलानों ने बंगाल की सियासत को और गर्मा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि चुनावी माहौल में इन वादों का जनता पर कितना असर पड़ता है।