Newshaat_Logo

2030 तक 800 Vande Bharat! इन रूट्स पर सबसे ज्यादा डिमांड..Indian Railways का बड़ा प्लान...

National: भारतीय रेलवे 2030 तक करीब 800 वंदे भारत ट्रेनें चलाने की तैयारी में है. बढ़ती यात्रियों की संख्या और मांग को देखते हुए रेलवे देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले रूट्स पर इन ट्रेनों का विस्तार करेगा. दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-जयपुर, मुंबई-अहमदाबाद और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे व्यस्त रूट्स पर वंदे भारत की मांग लगातार बढ़ रही है.
 
national

National: भारतीय रेलवे अपने आधुनिकीकरण के सबसे बड़े दौर से गुजर रहा है। इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी वंदे भारत एक्सप्रेस अब देश के प्रमुख रेल रूट्स पर यात्रियों की पहली पसंद बनती जा रही है। सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए तैयार मेगा मास्टरप्लान के तहत 2030 तक 800 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेन सेट चलाने का लक्ष्य रखा है।

Etv Bharat

वंदे भारत सिर्फ आधुनिक और तेज रफ्तार रेल सेवा की पहचान नहीं रही, बल्कि रेलवे के लिए कमाई का एक अहम जरिया भी बनती जा रही है। बढ़ती यात्री संख्या और कई रूट्स पर लगातार बढ़ रही मांग ने रेलवे को इस नेटवर्क के विस्तार के लिए प्रोत्साहित किया है।

यात्रियों की संख्या में 34 फीसदी का उछाल

रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 2.97 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत से सफर किया था। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 3.98 करोड़ पहुंच गया। यानी एक साल में यात्रियों की संख्या में करीब 34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वर्ष 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी रूट पर पहली वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू की गई थी। इसके बाद से अब तक 9.1 करोड़ से अधिक यात्री वंदे भारत ट्रेनों में सफर कर चुके हैं।

इन रूट्स पर सीटों की सबसे ज्यादा मांग

वंदे भारत की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की ऑक्यूपेंसी 100 फीसदी से भी ऊपर दर्ज की जा रही है। तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु, नई दिल्ली-वाराणसी और सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम जैसे रूट्स पर सीटों की मांग काफी ज्यादा है।

100 फीसदी से अधिक ऑक्यूपेंसी का मतलब यह है कि ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से अंतिम स्टेशन तक की सीटों के अलावा बीच के स्टेशनों से भी लगातार बुकिंग होती रहती है। इससे एक ही सीट का इस्तेमाल अलग-अलग यात्री यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में करते हैं।

वंदे भारत से रेलवे की कमाई में भी बड़ा इजाफा

वंदे भारत की बढ़ती लोकप्रियता का असर रेलवे के राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है। दक्षिण रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में वंदे भारत से करीब 540.65 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह कमाई बढ़कर 803 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यानी एक साल में वंदे भारत से होने वाले राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

रात के सफर के लिए वंदे भारत स्लीपर

रेलवे अब वंदे भारत नेटवर्क को सिर्फ दिन के सफर तक सीमित नहीं रखना चाहता। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर को भी सेवा में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य रात के सफर को तेज, आरामदायक और प्रीमियम अनुभव देना है।

शुरुआती चरण में ही वंदे भारत स्लीपर को यात्रियों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1.21 लाख से ज्यादा यात्री स्लीपर सेवा में सफर कर चुके हैं और कई यात्राओं में ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चली हैं।

हवाई और सड़क यात्रियों को रेलवे की ओर लाने की तैयारी

वंदे भारत के विस्तार के पीछे रेलवे का बड़ा लक्ष्य प्रीमियम यात्रियों को आकर्षित करना भी है। सरकार चाहती है कि तेज रफ्तार, बेहतर सुविधाओं और आरामदायक यात्रा के जरिए ऐसे यात्रियों को रेलवे की ओर लाया जाए, जो फिलहाल लंबी दूरी के लिए हवाई या सड़क मार्ग को प्राथमिकता देते हैं।

अगर 2030 तक 800 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेन सेट का लक्ष्य हासिल होता है, तो देश के रेल नेटवर्क में तेज और आधुनिक ट्रेनों की मौजूदगी काफी बढ़ जाएगी। इससे प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ-साथ रेलवे के प्रीमियम यात्री और राजस्व आधार के विस्तार की उम्मीद है।