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उपराष्ट्रपति चुनाव में किसकी जीत तय? आमने-सामने अल्वा और धनखड़
 

एनडीए की ओर से बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) के नाम पर मुहर लगने के बाद अब उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी दलों ने राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा (Margaret Alva) को उम्मीदवार घोषित किया है. एनसीपी चीफ शरद पवार (Sharad Pawar) ने दिल्ली में रविवार को विपक्षी दलों की बैठक के बाद उनके नाम की घोषणा की है. 80 साल की अल्वा मूल रूप से कर्नाटक के मैंगलुरु की रहने वाली हैं. उपराष्ट्रपति पद के लिए जगदीप धनखड़ और मार्गरेट अल्वा के बीच मुकाबला होगा.

भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए रविवार को विपक्ष की उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस नेता मार्गेट अल्वा के नाम की घोषणा की गई है. राकांपा प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने उनके नाम का एलान किया. इससे पहले दिल्ली में राकांपा प्रमुख शरद पवार के आवास पर विपक्षी दलों की बैठक हुई. बैठक में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge), माकपा नेता सीताराम येचुरी (Sitaram Yechury), शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) और अन्य मौजूद रहे.

इस बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव व संसद के आगामी सत्र को लेकर चर्चा की गई. बैठक के राकांपा प्रमुख शरद पवार ने उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार के तौर पर मार्गेट अल्वा के नाम की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस सर्वसम्मत निर्णय के लिए 17 दल शामिल हैं. मार्गरेट अल्वा 19 तारीख को अपना नामांकन दाखिल करेंगी. बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से संपर्क नहीं हो पाया. विपक्ष के उम्मीदवार को अब तक 17 पार्टियों का समर्थन है.

शरद पवार ने कहा, "हम ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछली बार उन्होंने हमारे संयुक्त राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का समर्थन किया था." वहीं शिवसेना ने उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ रहने का फैसला लिया है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि विपक्ष इस चुनाव में एकजुट है. 

इधर मार्गरेट अल्वा ने ट्वीट कर कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में नामित होना मेरे लिए विशेषाधिकार और सम्मान की बात है. मैं  विपक्ष की उम्मीदवार बनाए जाने के लिए विपक्षी नेताओं को धन्यावाद देती हूं कि उन्होंने इस पद के लिए मुझ पर अपना भरोसा जताया है.

कौन हैं मार्गरेट अल्वा?

मार्गरेट अल्वा राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं. राजीव कैबिनेट में संसदीय कार्य और युवा विभाग की मंत्री रही हैं, जबकि राव की सरकार पब्लिक और पेंशन विभाग की मंत्री रही हैं. 

मार्गरेट अल्वा गुजरात, राजस्थान, गोवा और उत्तराखंड का राज्यपाल रह चुकी हैं. अल्वा उत्तराखंड की पहली महिला राज्यपाल रही हैं. वे 2009 से 2012 तक उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में काम कर चुकी हैं. इसके अलावा, राजस्थान में 2012-2014 तक राज्यपाल रही हैं। इसी दौरान उन्हें गुजरात और गोवा का प्रभार भी मिला था.

पांच बार की सांसद रहीं मार्गरेट अल्वा ने पिछले साल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार की धर्मांतरण विरोधी विधेयक के लिए जमकर आलोचना की थी. उन्होंने यहां तक कहा था कि "मुझे अक्सर मिशनरी स्कूलों और कॉलेजों में सीटों के लिए भाजपा सांसदों और विधायकों के कॉल आते हैं. अगर हम उनका धर्मांतरण करते हैं तो वे अपने बच्चों को ईसाई स्कूलों में क्यों भेजते हैं?

उन्होंने कहा था- क्रिश्चियन पावर ने 200 साल तक भारत पर शासन किया. ब्रिटिश, फ्रांसीसी, पुर्तगाली और डच यहां थे. आज हम देश की जनसंख्या का मुश्किल से 3 प्रतिशत हैं. अगर हमने धर्मांतरण किया था तो हमें कम से कम 30 प्रतिशत होना चाहिए था. 

कांग्रेस आलाकमान को दिखाती रही हैं आंख 

2008 में विधानसभा चुनाव के दौरान अल्वा ने कांग्रेस हाईकमान पर टिकट बेचने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें कांग्रेस ने महासचिव पद से हटा दिया था. अल्वा उस वक्त महाराष्ट्र, मिजोरम और पंजाब-हरियाणा के प्रभारी थी. हालांकि, गांधी परिवार से नजदीकी रिश्ते होने की वजह से उन्हें उत्तराखंड में राज्यपाल बनाकर भेजा गया था. इसके अलावा 2016 में अल्वा ने अपने बायोग्राफी करेज एंड कमिटमेंट में एक खुलासा किया था. उन्होंने लिखा था कि राजीव गांधी जब शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अध्यादेश लाने जा रहे थे, तब मैंने उन्हें मौलवियों के आगे नहीं झुकने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने मेरा सुझाव मानने से इनकार कर दिया था.

अल्वा का मुकाबला एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ से होगा. धनखड़ वर्तमान में बंगाल के राज्यपाल हैं. 70 साल के जगदीप धनखड़ को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जुलाई 2019 को बंगाल का 28वां राज्यपाल नियुक्त किया था. वे 1989 से 1991 तक राजस्थान के झुंझुनू से लोकसभा सांसद रहे. 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे.

उपराष्ट्रपति को मिलती है कितनी सैलरी?

देश के उपराष्ट्रपति का वेतन 'संसद अधिकारी के सैलरी और भत्ते अधिनियम, 1953' के तहत निर्धारित किया जाता है. उपराष्ट्रपति को कोई वेतन नहीं मिलता है. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का अध्यक्ष भी होता है, इसलिए उन्हें अध्यक्ष की सैलरी और सुविधाओं का भुगतान किया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उपराष्ट्रपति को हर महीने 4 लाख रुपये सैलरी मिलती है. इसके अलावा उन्हें कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं. उपराष्ट्रपति दैनिक भत्ता, मुफ्त आवास, चिकित्सा, यात्रा और अन्य सुविधाओं के हकदार हैं. उपराष्ट्रपति के लिए पेंशन वेतन का 50% है. 

जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति बनना है तय?

उपराष्ट्रपति के चुनाव में राज्य सभा और लोकसभा के सदस्य देश के उपराष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए मतदान करते हैं. संसद में सदस्यों की मौजूदा संख्या 780 है, जिनमें से बीजेपी के 394 सांसद हैं. जीत के लिए 390 से अधिक मतों की जरूरत होती है. ऐसे में ये तय माना जा रहा है कि देश के अगले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ही बनेंगे. 

उपराष्ट्रपति का चुनाव कब है?

भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 5 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की थी. चुनाव 6 अगस्त को होंगे और 19 जुलाई को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है. मौजूदा उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है. बताते चलें कि जगदीप धनखड़ 18 जुलाई को नामांकन दाखिल करेंगे वहीं एक दिन बाद मार्गरेट अल्वा भी अपना नामांकन भरेंगी.