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17 महीने के बच्चे ने जाते-जाते बचाई कई जिंदगियां, तमिलनाडु का सबसे कम उम्र का ऑर्गन डोनर बना

Chennai: राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित किए गए 17 महीने के बच्चे के माता-पिता ने उसके अंगदान का फैसला लिया. हाइड्रोसिफलस से पीड़ित बच्चे का पिछले छह दिनों से इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ. 24 अगस्त को चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया. 
 
CHENNAI

Chennai: राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल, चेन्नई में इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित किए गए 17 महीने के बच्चे के अंगदान का मामला सामने आया है। माता-पिता की सहमति के बाद बच्चे के अंगों का दान किया गया। इस अंगदान के साथ बच्चा तमिलनाडु का सबसे कम उम्र का ऑर्गन डोनर बन गया है।

17 month old Brain dead child organs donated, becomes youngest donor of Tamil Nadu

इससे पहले इसी अस्पताल में 20 महीने के बच्चे के अंगदान का मामला सामने आया था। ऐसे में 17 महीने के बच्चे के अंगदान ने राज्य में सबसे कम उम्र के ऑर्गन डोनर का रिकॉर्ड बनाया है।

हाइड्रोसिफलस से पीड़ित था बच्चा

जानकारी के मुताबिक, बच्चा हाइड्रोसिफलस से पीड़ित था। इस बीमारी में मस्तिष्क के आसपास अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। गंभीर हालत में बच्चे को चेन्नई के राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

डॉक्टरों की टीम पिछले छह दिनों से बच्चे को इंटेंसिव केयर में रखकर इलाज कर रही थी। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ।

24 अगस्त को ब्रेन डेड घोषित

चिकित्सकीय जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद डॉक्टरों ने 24 अगस्त, सोमवार की सुबह बच्चे को ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद अस्पताल की ओर से परिवार को अंगदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।

बच्चे की गंभीर स्थिति के बीच माता-पिता पहले से ही गहरे सदमे में थे। इसके बावजूद उन्होंने दूसरे जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचाने की उम्मीद में अपने बच्चे के अंगदान का फैसला लिया।

माता-पिता के फैसले की सराहना

मद्रास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल शांतारमन ने बच्चे के माता-पिता के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपने बच्चे को खोने के गहरे दुख के बावजूद माता-पिता ने जिस तरह स्वेच्छा से अंगदान का निर्णय लिया, वह समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी और जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने की दिशा में समाज आगे आएगा।

सम्मान के साथ परिवार को सौंपा गया शव

अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे के शव को सम्मान दिया गया। अस्पताल में सम्मान के बाद शव को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।

17 महीने के बच्चे के अंगदान की यह घटना न केवल चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी किसी परिवार का फैसला दूसरे लोगों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है।