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31 मई की रात आसमान में दिखेगा दुर्लभ ब्लू माइक्रोमून, स्काई-वॉचर्स के लिए खास मौका

MicroMoon: 31 मई 2026 को एक दुर्लभ ब्लू माइक्रोमून पूर्ण चंद्रमा के रूप में नजर आएगा. यह घटना दो अलग-अलग चंद्र घटनाओं का अनोखा संगम है, जो इसे साल के सबसे रोचक खगोलीय दृश्यों में से एक बनाती है. खगोलशास्त्रियों के अनुसार चंद्रमा 31 मई को UTC समयानुसार सुबह 8:45 बजे यानी भारतीय समयानुसार करीब 2:15 PM को सबसे ज्यादा चमक रहा होगा.
 
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MicroMoon:31 मई की रात आसमान में एक बेहद खास खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा. इस दिन “ब्लू माइक्रोमून” दिखाई देगा, जिसे खगोल विज्ञान में एक दुर्लभ घटना माना जाता है. दुनियाभर के स्काई-वॉचर्स और खगोल प्रेमियों के लिए यह एक शानदार मौका होगा. 31 मई 2026 को एक दुर्लभ ब्लू माइक्रोमून पूर्ण चंद्रमा के रूप में नजर आएगा. यह घटना दो अलग-अलग चंद्र घटनाओं का अनोखा संगम है, जो इसे साल के सबसे रोचक खगोलीय दृश्यों में से एक बनाती है. खगोलशास्त्रियों के अनुसार चंद्रमा 31 मई को UTC समयानुसार सुबह 8:45 बजे यानी भारतीय समयानुसार करीब 2:15 PM को सबसे ज्यादा चमक रहा होगा. उस वक्त चंद्रमा पृथ्वी से करीब 4,06,000 किलोमीटर दूर होगा.

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ब्लू माइक्रोमून क्या होता है?

ब्लू मून उस स्थिति को कहते हैं जब किसी एक कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमाएं पड़ती हैं. मई 2026 में पहली पूर्णिमा पहले आ चुकी है और 31 मई को दूसरी पूर्णिमा पड़ रही है, इसलिए इसे ब्लू मून कहा जा रहा है. दूसरी तरफ माइक्रोमून तब होता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा के सबसे दूर वाले बिंदु यानी अपोजी के पास होता है. इस कारण चंद्रमा सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत छोटा और करीब 10 प्रतिशत कम चमकीला दिखता है.

हालांकि यह फर्क नंगी आंखों से पकड़ पाना आसान नहीं होता. इन दोनों घटनाओं का एक साथ होना इसे और भी खास बना देता है, क्योंकि ऐसा संयोग बहुत कम बार देखने को मिलता है. "ब्लू मून" नाम सुनकर लगता है कि चंद्रमा नीले रंग का दिखेगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होगा. यह नाम केवल कैलेंडर महीने में दूसरी पूर्णिमा के समय को दर्शाता है, न कि चंद्रमा के वास्तविक रंग को. देखने पर चंद्रमा अपने सामान्य सफेद या हल्के सुनहरे रंग में ही नजर आएगा.

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क्यों है यह इतना दुर्लभ?

ब्लू मून और माइक्रोमून का एक साथ होना बहुत कम देखने को मिलता है. यही कारण है कि इसे दुर्लभ खगोलीय घटना माना जा रहा है. खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा नजारा कई वर्षों बाद देखने को मिलता है.

क्या होगा खास अनुभव?

हालांकि माइक्रोमून सामान्य फुल मून से लगभग 10-15 प्रतिशत छोटा दिखाई देता है, लेकिन इसका दुर्लभ संयोजन इसे खास बनाता है. खगोल प्रेमियों के लिए यह फोटोग्राफी और स्काई ऑब्जर्वेशन का बेहतरीन मौका होगा.

कब और कहां देखें यह नजारा?

भारत समेत दुनिया भर के आसमान प्रेमियों के लिए यह एक शानदार मौका है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चंद्रमा उगने के तुरंत बाद या देर शाम के वक्त चंद्रमा को देखना सबसे अच्छा अनुभव देता है. दक्षिणी गोलार्ध और प्रशांत क्षेत्र में यह नजारा और भी प्रभावशाली रहेगा क्योंकि वहां चंद्रमा तारामंडल के चमकीले लाल तारे एंटारेस के करीब दिखेगा. उत्तरी गोलार्ध के दर्शक भी रात के दौरान इस तारे को चंद्रमा के पास देख सकते हैं.

अगर आपको इस नज़ारा को एकदम साफ देखना है तो आप किसी खुले स्थानों पर जा सकते हैं. जैसे - समुद्र तट, छत, पार्क या ग्रामीण इलाकों का चुनाव करें जहां आर्टिफिशियल लाइट कम हो और पूर्वी क्षितिज बाधारहित हो. मौसम की जानकारी पहले ले लेना भी जरूरी है क्योंकि बादल छाए रहने पर आपको चंद्रमा साफ नज़र नहीं आएगा.

माइक्रोमून और सुपरमून में मुख्य फर्क यह है कि सुपरमून तब दिखता है जब चंद्रमा पेरिजी यानी पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे वह बड़ा और चमकीला लगता है. माइक्रोमून इससे बिल्कुल उलट है और सुपरमून के मुकाबले करीब 12 से 14 प्रतिशत छोटा दिख सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार जून 2026 का स्ट्रॉबेरी मून भी माइक्रोमून हो सकता है, जिससे एक के बाद एक माइक्रोमून की रेयर सीरीज बन सकती है.