होर्डिंग विवाद मामले में अभिषेक बनर्जी से 6 घंटे तक पूछताछ, TMC सांसद ने बताया ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’
Kolkata: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से होर्डिंग विवाद मामले में मंगलवार को करीब छह घंटे तक पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद शेक्सपीयर सरणी पुलिस थाने के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से कार्रवाई कर रही है।
मामला अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय से कथित तौर पर अनधिकृत होर्डिंग हटाने के दौरान अधिकारियों और पार्टी समर्थकों के बीच हुई झड़प से जुड़ा है। इस मामले में पुलिस ने तीन प्राथमिकी दर्ज की हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
होर्डिंग हटाने के लिए करीब 1,000 लोग भेजने का आरोप
पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय से होर्डिंग हटाने के लिए करीब 1,000 लोगों को भेजा गया था। उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाने की राजनीतिक कोशिश बताया।
अभिषेक ने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि झूठे मुकदमे दर्ज कर तृणमूल कांग्रेस को रोका जा सकता है, तो यह उसकी गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन पार्टी अपने राजनीतिक अभियान से पीछे नहीं हटेगी।
गिरफ्तार लोगों को ‘यातना’ देने का आरोप
TMC महासचिव ने 27 अगस्त को हुई घटना के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों को कथित तौर पर ‘यातना’ दिए जाने का भी आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने अपने इस आरोप के समर्थन में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
अभिषेक बनर्जी के इन आरोपों पर पुलिस या सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
KMC की टीम और पुलिस के पहुंचने पर हुई थी झड़प
पुलिस के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (KMC) के अधिकारी और पुलिसकर्मी सड़क की ओर बने लोहे के ढांचे पर लगे होर्डिंग को हटाने के लिए अभिषेक बनर्जी के कार्यालय परिसर में पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद निजी सुरक्षा गार्डों, TMC समर्थकों और कुछ पार्टी नेताओं के साथ अधिकारियों की कथित झड़प हो गई।
आरोप है कि होर्डिंग हटाने का विरोध करते हुए कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों और नगर निगम के अधिकारियों के साथ हाथापाई की। घटना के बाद पुलिस ने तीन प्राथमिकी दर्ज की और कई लोगों को गिरफ्तार किया।
दो FIR में आरोपी हैं अभिषेक बनर्जी
होर्डिंग विवाद से जुड़े मामले में अभिषेक बनर्जी को दो प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था।
अभिषेक बनर्जी मंगलवार दोपहर करीब 12:15 बजे शेक्सपीयर सरणी पुलिस थाने पहुंचे। इस दौरान थाने के बाहर बड़ी संख्या में TMC समर्थक मौजूद रहे और उन्होंने नारेबाजी करते हुए राज्य सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
TMC कार्यकर्ताओं पर लगाए गए गंभीर आरोप
मामले में पुलिस की ओर से कुछ लोगों पर सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने और महिला पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि इन्हीं आरोपों और घटना से जुड़े तथ्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और नामजद लोगों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं।
डेरेक ओब्रायन ने पुलिस और KMC के दावों को बताया गलत
TMC की ओर से लगातार आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ चुनिंदा तरीके से कार्रवाई कर रही है। घटना के समय मौके पर मौजूद रहे और एक प्राथमिकी में नामजद TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा पुलिस को रोकने की कोशिश किए जाने संबंधी दावों को गलत बताया।
डेरेक ओब्रायन का कहना था कि निजी सुरक्षाकर्मी कार्यालय के प्रवेश द्वार पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे।
‘अवैध नोटिस के साथ कार्यालय में घुसी पुलिस’
डेरेक ओब्रायन ने आरोप लगाया कि पुलिस एक ‘अवैध’ नोटिस लेकर कार्यालय परिसर में दाखिल हुई और इस दौरान वरिष्ठ नेताओं के साथ मारपीट तथा पार्टी समर्थकों और कार्यालय कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
TMC नेता के इन आरोपों को पुलिस और प्रशासन की ओर से खारिज किए जाने या इन पर विस्तृत प्रतिक्रिया दिए जाने का इंतजार है।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा- कानून सभी के लिए समान
राज्य की वरिष्ठ मंत्री और BJP नेता अग्निमित्रा पॉल ने TMC के राजनीतिक बदले के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी ने पुलिस के काम में बाधा डाली या पुलिसकर्मियों पर हमला किया, तो उसे कानून का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से जोड़ना उचित नहीं है।
अभिषेक के वकील ने उठाया FIR ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा
अभिषेक बनर्जी के वकीलों ने पुलिस के नोटिस को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि BNSS की धारा 35 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन संबंधित प्राथमिकी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं कराई गई है।
वकीलों ने शेक्सपीयर सरणी पुलिस को जवाबी नोटिस भेजते हुए दावा किया कि FIR की प्रति ऑनलाइन अपलोड नहीं करना सुप्रीम कोर्ट के ‘यूथ बार एसोसिएशन’ मामले में दिए गए निर्देशों के विपरीत है। वकीलों ने यह भी कहा कि इस मामले में पुलिस को अदालत की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
डेरेक ओब्रायन को फिर नोटिस, 2 सितंबर को बुलाया
घटना के समय कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय में मौजूद डेरेक ओब्रायन को भी पुलिस ने जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया था। वह पहले निर्धारित समय पर जांच अधिकारी के समक्ष पेश नहीं हुए।
इसके बाद पुलिस ने उनके आवास पर दूसरा नोटिस भेजा है। इसमें उन्हें 2 सितंबर को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।
पुलिस ने बताई कार्रवाई की वजह
कोलकाता पुलिस का कहना है कि मामले में कार्रवाई घटना के दौरान सामने आए आरोपों और दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, मामले में नामजद आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किए गए हैं।
फिलहाल अभिषेक बनर्जी से हुई छह घंटे की पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों के सामने क्या-क्या जानकारी सामने आई, इसकी आधिकारिक जानकारी पुलिस की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।







