ऑपरेशन ‘खेला’ के बाद ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज! क्या उद्धव ठाकरे और विपक्षी दलों पर मंडरा रहा नया राजनीतिक संकट?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विपक्षी दलों के भीतर असंतोष और अंदरूनी खींचतान नए रूप में सामने आ रही है। इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच “ऑपरेशन टाइगर” और “ऑपरेशन डिलिमिटेशन” जैसे शब्दों की चर्चा भी तेज हो गई है।
उद्धव की बैठक में सांसदों की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई थी, लेकिन सभी सांसद इसमें शामिल नहीं हो सके। कुछ सांसदों ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया, जबकि पार्टी नेतृत्व ने दावा किया कि सभी सांसद संगठन के साथ मजबूती से खड़े हैं। हालांकि विपक्षी खेमे में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बंगाल से महाराष्ट्र तक सियासी हलचल
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सांसदों के एक अलग राजनीतिक मंच के साथ जाने की खबरों ने पहले ही सियासी तापमान बढ़ा दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे घटनाक्रम आगे भी जारी रहते हैं तो विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर असर पड़ सकता है।
‘ऑपरेशन डिलिमिटेशन’ को लेकर बढ़ी चर्चा
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि संसद के आगामी सत्र में महत्वपूर्ण संवैधानिक और चुनावी सुधारों से जुड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं। ऐसे में विभिन्न दलों के सांसदों का रुख सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। इसी वजह से कुछ विश्लेषक वर्तमान घटनाक्रम को संभावित राजनीतिक पुनर्संरचना से जोड़कर देख रहे हैं।
आगे किस दल पर होगी नजर?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई क्षेत्रीय दलों के भीतर की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी। बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब अन्य राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। हालांकि इन तमाम अटकलों के बीच संबंधित दलों की ओर से अपने संगठन को पूरी तरह एकजुट बताया जा रहा है।
फिलहाल, विपक्षी राजनीति में चल रही हलचल ने आगामी महीनों के सियासी घटनाक्रम को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है।







