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बंगाल में नई सरकार बनने के बाद पुराने मामलों की फाइलें खुलीं, दर्जनों राजनीतिक कार्यकर्ता कोर्ट में कर रहे सरेंडर

Kolkata: अलग-अलग पार्टियों के दर्जनों नेता और कार्यकर्ता अब कोर्ट में सरेंडर कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के प्रभावशाली नेता अशोक रॉय समेत 36 लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. इसके अलावा गुरुवार (14 मई) को दर्जनों कार्यकर्ताओं ने इस्लामपुर कोर्ट में सरेंडर किया है. बताया जा रहा है कि पेंडिंग केस में वारंट जारी होने के बाद लोगों में हलचल मची हुई है.
 
NATIONAL

Kolkata: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कई पुराने मामलों में कार्रवाई तेज होने लगी है. विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े दर्जनों कार्यकर्ता अब अदालतों में पहुंचकर सरेंडर कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि लंबित मामलों में वारंट जारी होने के बाद यह हलचल बढ़ी है. 

अलग-अलग पार्टियों के दर्जनों नेता और कार्यकर्ता अब कोर्ट में सरेंडर कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के प्रभावशाली नेता अशोक रॉय समेत 36 लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. इसके अलावा गुरुवार (14 मई) को दर्जनों कार्यकर्ताओं ने इस्लामपुर कोर्ट में सरेंडर किया है. बताया जा रहा है कि पेंडिंग केस में वारंट जारी होने के बाद लोगों में हलचल मची हुई है.

TMC-कांग्रेस और CPM के कार्यकर्ताओं ने किया सरेंडर

गुरुवार को उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा ब्लॉक के अलग-अलग इलाकों से तृणमूल कांग्रेस, CPM और कांग्रेस के कुल दर्जनों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इस्लामपुर कोर्ट में सरेंडर किया. चोपड़ा लंबे समय से पॉलिटिकल झगड़ों और अशांति के लिए जाना जाता रहा है. नई सरकार के आने के बाद, प्रशासन ने इलाके में कानून का राज स्थापित करने और पुराने केस निपटाने में एक्टिव रोल निभाया है. पता चला है कि कुछ आरोपियों ने पुलिस अरेस्ट के डर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

CPM और कांग्रेस लीडरशिप ने पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन के इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने दावा किया कि एडमिनिस्ट्रेशन की कार्रवाई कानून के आधार पर होनी चाहिए, न कि पॉलिटिकल पहचान के आधार पर.

CPM और कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा

CPM जिला सेक्रेटरी अनवारुल हक ने कहा, केश तो बहुत है, बहुत लोगों के खिलाफ वारंट है. पुलिस सक्रीय हुई है इसलिए हमारे लोग सरेंडर कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस नेता अशोक दास ने कहा, तृणमूल के शासनकाल में हम लोग कितना अधिक अत्याचार का शिकार थे उसका नमूना है कि आज वह लोग अदालत में आयें है. 2018 के पंचायत चुनाव समय में दासपाड़ा पंचायत गठन के वक्त शमीरूल इस्लाम नाम के एक शख्स की मौत होती है. पुलिस के सामने रहने पर भी 24 लोगों के खिलाफ झूठे मामले रजीस्टर किया गया. उस मामले में बाद में पुलिस ने 57 लोगों के नाम से चार्ज सीट दिया. उसी मामले में  36 लोगों ने आत्मसमर्पण किये है.

इस मामले में सरकारी वकील संजय भवाल ने फोन पर बताया कि एक हत्याकांड में गुरुवार को 36 लोगों ने सरेंडर किया है. सभी का ज़मानत खारिज कर दिया गया है और सभी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

राज्य में सरकार बदलने के बाद, उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा ब्लॉक में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. लंबे समय से पेंडिंग केस और अरेस्ट वारंट तामील होने लगे हैं, जिससे अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के कार्यकताओं और समर्थकों में हलचल बढ़ गई है.

सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे मामले जो लंबे समय से लंबित थे, उनमें अब कानूनी प्रक्रिया तेज हुई है. अदालतों से वारंट जारी होने के बाद संबंधित राजनीतिक कार्यकर्ता कोर्ट में आत्मसमर्पण कर रहे हैं ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई का सामना किया जा सके.

राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव बनाकर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता.

कानूनी जानकारों का मानना है कि कई पुराने मामलों में लंबे समय से सुनवाई लंबित थी और अब उन पर कार्रवाई होने लगी है. इससे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और अधिक गरमा सकती है.

वहीं अदालतों में सरेंडर करने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है.