संसद सत्र से पहले मायावती का केंद्र पर हमला, बोलीं- हंगामे नहीं, महंगाई-बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर हो गंभीर चर्चा
UP News: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों से राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीरता दिखाने की अपील की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस बार भी संसद का सत्र हंगामे और बार-बार स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा या फिर महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और अन्य जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए अपने विस्तृत पोस्ट में मायावती ने कहा कि देश इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में संसद का समय राजनीतिक टकराव में नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान में लगना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा मामले से लेकर महिला सुरक्षा तक उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर जनता में नाराजगी है और लोग जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे की चर्चा सड़क से लेकर अदालत तक हो रही है और संसद में भी इसके उठने की संभावना है।
इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति, राजस्थान में कथित सरकारी लापरवाही के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में महिला असुरक्षा, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, चुनावी घोषणाओं में अनियमितता, पुलिस मुठभेड़ों और बुलडोजर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई।
‘देश की समस्याओं पर सत्ता और विपक्ष मिलकर करें काम’
मायावती ने कहा कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, परीक्षा पत्र लीक, संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था, अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों जैसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका सबसे अधिक असर आम जनता, खासकर वंचित और बहुजन समाज पर पड़ेगा।
‘लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप चले संसद’
बसपा प्रमुख ने अपने संदेश में संसद के मानसून सत्र को शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से चलाने की अपील करते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों और संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे जनता के हितों को प्राथमिकता दें। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा संसद सत्र से ही राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर और संवेदनशील चर्चा की शुरुआत होगी।
मायावती ने अपने संदेश का समापन “जनहितैषी गुड गवर्नेंस के लिए संसद का प्रभावी होना जरूरी है। जय भीम, जय भारत।” के साथ किया।







