आरक्षण पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला, बोले- BJP सरकार में PDA वर्ग के 11 हजार से अधिक पदों की हुई ‘लूट’
UP, Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग के आरक्षण में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला है।
‘संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने ‘PDA ऑडिट अंक-1’ नामक एक दस्तावेज और लाल रंग की पुस्तक जारी की। इसे उन्होंने ‘PDA आरक्षण घोटाला पुस्तक’ का नाम दिया और दावा किया कि भाजपा सरकार में आरक्षण व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया है।
11,514 पदों की ‘लूट’ का आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राज्य की 22 सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण पिछड़े और दलित वर्गों के 11,514 पद प्रभावित हुए।
उन्होंने विशेष रूप से 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि इस भर्ती में ओबीसी और एससी वर्ग को मिलने वाला आरक्षण कम कर दिया गया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा।
सत्ता में आए तो 90 दिन में होगी जातीय जनगणना
सपा प्रमुख ने घोषणा की कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो सरकार बनने के पहले 90 दिनों के भीतर जातीय जनगणना कराई जाएगी। साथ ही 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों को उनका “पूरा आरक्षण अधिकार” दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई दया या कृपा नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकार है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
लेटरल एंट्री और भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर लेटरल एंट्री के जरिए नियुक्तियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इससे पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रोजगार और भर्ती के मामलों में युवाओं को न्याय के लिए अदालतों का रुख करना पड़ रहा है, जो व्यवस्था की गंभीर खामियों को दर्शाता है।
चुनावी तैयारी का भी दिया मंत्र
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति का संदेश देते हुए कहा कि यदि प्रत्येक बूथ पर कुछ नए मतदाता भी जोड़े जाएं तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी आने वाले दिनों में अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट और अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाएगी।
अब आरक्षण पर सियासत तेज होने के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए आरक्षण, सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ सकते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का यह अभियान आने वाले समय में सियासी बहस को और तेज कर सकता है।







