BSc पास दो सहेलियों की गजब कहानी! नौकरी छोड़ी, 16 लाख का लोन लिया और शुरू की ‘श्री कान्हा भोग’ फ्लोर मिल
पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करना ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है. इस सोच को अपनी मेहनत और हौसले से चुनौती देते हुए BSc पास दो सहेलियों ने नौकरी छोड़कर खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया. दोनों ने 16 लाख रुपये का लोन लेकर फ्लोर मिल की शुरुआत की और अपने कारोबार को ‘श्री कान्हा भोग’ नाम दिया.
UP Real Success Story: अच्छी नौकरी की तलाश में जहां युवा सालों तक मेहनत करते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की दो सहेलियों ने अपना कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी। बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्योति वर्मा और शैलजा ने नौकरी के बजाय उद्यमिता को प्राथमिकता दी। पूंजी की कमी उनके रास्ते में आई, लेकिन दोनों ने हिम्मत नहीं हारी। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत 16 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने फ्लोर मिल शुरू की। आज उनका उद्यम ‘श्री कान्हा भोग’ ब्रांड के नाम से बाजार में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

नौकरी के बजाय कारोबार का फैसला
लखीमपुर खीरी की 25 वर्षीय ज्योति वर्मा ने अपनी सहेली शैलजा के साथ मिलकर आटा उत्पादन का कारोबार शुरू करने की योजना बनाई। दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कारोबार के लिए पूंजी जुटाने की थी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ लिया और 16 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने व्यवसाय की नींव रखी।
एक बीघा जमीन लीज पर लेकर लगाई फ्लोर मिल
ज्योति और शैलजा ने आधा चाट गांव में एक बीघा जमीन लीज पर लेकर फ्लोर मिल स्थापित की। शुरुआत में उत्पादन और बाजार तक अपने उत्पाद को पहुंचाने जैसी चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद दोनों ने मेहनत जारी रखी। कारोबार को आगे बढ़ाने में उनके परिवार के सदस्य भी सहयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का हौसला मिला है।
‘श्री कान्हा भोग’ ब्रांड को बाजार में स्थापित करने की चुनौती
दोनों सहेलियों ने अपने आटे को ‘श्री कान्हा भोग’ नाम दिया है। बाजार में पहले से कई स्थापित कंपनियों के उत्पाद मौजूद हैं। ऐसे में ग्राहकों का भरोसा जीतना और अपने ब्रांड की पहचान बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती है। दोनों अपने उत्पाद की आपूर्ति बढ़ाने और कारोबार को विस्तार देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
फ्लोर मिल से कई लोगों को मिला रोजगार
ज्योति और शैलजा का उद्यम केवल उनके लिए रोजगार का जरिया नहीं बना, बल्कि दूसरे लोगों की आजीविका में भी योगदान दे रहा है। फ्लोर मिल में गेहूं की धुलाई और सफाई जैसे कामों के लिए करीब छह महिलाओं को रोजगार मिला है। वहीं, जिले में उत्पाद की आपूर्ति से जुड़े कार्यों के जरिए नौ अन्य लोग भी अपनी आजीविका चला रहे हैं।







