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ब्रेक लगाओ, बिजली बनाओ! आगरा मेट्रो का ये सिस्टम जानकर रह जाएंगे हैरान...

Agra Metro Technology:  मेट्रो ट्रेन में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक ऊर्जा की बचत करने में अहम भूमिका निभाती है. आगरा मेट्रो से जुड़ी चर्चा में खास है रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक, जिसमें ट्रेन की गति कम करने या ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली गतिज ऊर्जा को बिजली में बदला जा सकता है.

 
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Agra: आगरा मेट्रो में आधुनिक तकनीक के जरिए ट्रेन संचालन को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मेट्रो ट्रेन की रफ्तार कम होने पर ऊर्जा को बेकार जाने से बचाने के लिए रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था में ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को बिजली में बदलकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर में डिपो से सदर तक थर्ड रेल बिछाने का काम पूरा हो गया है। ट्रेनों को 750 वोल्ट डीसी बिजली की आपूर्ति इसी प्रणाली के जरिए की जाएगी।

आगरा मेट्रो में ब्रेक लगाते ही बनेगी बिजली, 750 वोल्ट से दौड़ेगी ट्रेन, जानिए  क्या है ये गजब की तकनीक

ऊपर नहीं, पटरियों के किनारे से मिलेगी बिजली

आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर और डिपो में थर्ड रेल प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। पारंपरिक इलेक्ट्रिक रेल व्यवस्था में जहां ऊपर बिजली के तार लगाए जाते हैं, वहीं थर्ड रेल तकनीक में ट्रैक के समानांतर एक अतिरिक्त रेल के जरिए ट्रेनों को बिजली मिलती है।

इस व्यवस्था में आगरा मेट्रो की ट्रेनें 750 वोल्ट डीसी बिजली से संचालित होंगी। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) के संयुक्त महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा के मुताबिक, इस तकनीक से मेट्रो के संचालन को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने में मदद मिलेगी।

ट्रेन के ब्रेक से कैसे बनेगी बिजली?

मेट्रो की खास तकनीक रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग ट्रेन की गति कम होने के दौरान काम करती है। सामान्य ब्रेकिंग में गति कम करने की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत, रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग में इलेक्ट्रिक मोटर जनरेटर की तरह काम करती है और गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देती है।

इस तरह पैदा हुई बिजली का इस्तेमाल ट्रेन के अन्य सिस्टम में किया जा सकता है या उपयुक्त व्यवस्था होने पर बिजली नेटवर्क में वापस भेजा जा सकता है। इससे ऊर्जा की खपत कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, वास्तविक बचत ट्रेन संचालन और बिजली प्रणाली की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

132 केवी बिजली से ट्रेनों तक पहुंचेगी सप्लाई

आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर की कुल लंबाई 29.4 किलोमीटर है। बिजली आपूर्ति के लिए तीन रिसीविंग सब स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें एक डिपो और दूसरा आईएसबीटी के पास स्थित है, जबकि तीसरे सब स्टेशन का निर्माण जारी है।

बिजली आपूर्ति की प्रक्रिया में ग्रिड से मिलने वाली 132 केवी बिजली को रिसीविंग सब स्टेशन पर 33 केवी में बदला जाएगा। इसके बाद ट्रैक्शन सब स्टेशन के माध्यम से इसे 750 वोल्ट डीसी में परिवर्तित कर ट्रेनों तक पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मेट्रो संचालन के लिए नियमित और व्यवस्थित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

लिफ्ट, एस्केलेटर और एसी के लिए अलग व्यवस्था

मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाओं के संचालन के लिए भी बिजली की अलग व्यवस्था होगी। लिफ्ट, एस्केलेटर, लाइट और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों को चलाने के लिए 33 केवी बिजली को 440 वोल्ट में बदला जाएगा। इससे ट्रेन संचालन और स्टेशन की सुविधाओं के लिए बिजली आपूर्ति की जरूरतों को अलग-अलग पूरा किया जा सकेगा।

आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बन रहा दूसरा कॉरिडोर

आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक दूसरे मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण जारी है। इस मार्ग पर विभिन्न स्टेशनों और संबंधित बुनियादी ढांचे का काम आगे बढ़ रहा है। डिपो से सदर तक थर्ड रेल बिछाने का काम पूरा होना परियोजना की प्रगति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

थर्ड रेल से बिजली आपूर्ति और रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से आगरा मेट्रो में ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाने की योजना है। इससे बिजली की खपत कम करने और मेट्रो संचालन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।