बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा दांव, आखिर चुनाव आयोग को क्यों लेना पड़ा ये फैसला....
Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी है. चुनाव आयोग ने बंगाल पुलिस-प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है. चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि अगर संभव हो तो मार्च के दूसरे सप्ताह तक संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान पूरी कर लें. चुनाव आयोग संवेदनशील क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती के लिए शुरुआती योजना बनाएगा.
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए प्री-पोल नामांकन चरण की सख्त निगरानी के लिए प्रत्येक क्षेत्र में एक-एक केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात करने का फैसला किया है. यह कदम पिछले चुनावों में नामांकन के दौरान हुई हिंसा, मतदाताओं को धमकाने और विपक्षी कार्यकर्ताओं पर दबाव की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार ये 294 केंद्रीय पर्यवेक्षक केंद्र सरकार के अधिकारी या अन्य राज्यों के अधिकारी होंगे. फिलहाल ईसीआई द्वारा 1,444 अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है. ट्रेनिंग पूरी होने पर इनमें से 294 को पश्चिम बंगाल की विधानसभा क्षेत्रों के लिए नामांकन चरण की निगरानी के लिए भेजा जाएगा.
ये पर्यवेक्षक चुनाव तिथियों की घोषणा और आदर्श आचार संहिता लागू होने के साथ ही अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे. ईसीआई ने पिछले कुछ चुनावों में नामांकन चरण से ही हिंसा की रिपोर्ट्स नोट की हैं. मुख्य शिकायतें मतदाताओं को डराना-धमकाना, विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंट्स पर दबाव डालने से जुड़ी हैं. साथ ही, प्री-पोल चरण में तैनात सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) का ठीक से उपयोग न होने की भी शिकायतें आई थीं. इस बार ईसीआई ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने देना चाहती है. इसलिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अलग से केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए जा रहे हैं, जो नामांकन प्रक्रिया, शिकायतों का निपटारा और सीएपीएफ की तैनाती की निगरानी करेंगे.
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सीएपीएफ वाहनों में जीपीएस ट्रैकर्स लगाए जाएंगे, ताकि पर्यवेक्षक रीयल-टाइम में उनकी मूवमेंट ट्रैक कर सकें. इस बीच, राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी तक होने की उम्मीद है. लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा गया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अंतिम सूची के साथ-साथ सप्लीमेंट्री लिस्ट भी प्रकाशित की जाएंगी. ईसीआई ने स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदाता सूची के पूर्ण प्रकाशन से पहले भी चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है, बशर्ते सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो.
4 मार्च को होली के तुरंत बाद चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित कर सकता है. पिछले चुनावों में 8 चरणों में मतदान हुआ था, लेकिन इस बार कम चरणों में चुनाव कराने की संभावना है. सीईओ कार्यालय ने एक ही चरण में चुनाव कराने की सिफारिश की है, ताकि प्रक्रिया सुचारू और निष्पक्ष हो. हालांकि अंतिम फैसला ईसीआई का होगा. राज्य में विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए अप्रैल-मई 2026 में चुनाव होने की उम्मीद है.







