Bengal Job Crisis टला? 26,000 लोगों को Supreme Court से बड़ी राहत
West Bengal: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित SSC भर्ती मामले में 26,000 नौकरियों को लेकर फिलहाल बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पात्र यानी बेदाग उम्मीदवारों की सेवाएं फिलहाल जारी रहेंगी। नई अंतरिम याचिका पर सुनवाई होने तक पहले का आदेश प्रभावी रहेगा।
दरअसल, भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पश्चिम बंगाल में SSC के जरिए हुई करीब 26,000 नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों की नौकरी को लेकर लगातार कानूनी लड़ाई चल रही है।
31 अगस्त तक नौकरी जारी रखने का था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पहले अपने आदेश में पात्र उम्मीदवारों को 31 अगस्त तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी थी। साथ ही SSC को निर्धारित समय के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में समय लग रहा है। इसी को देखते हुए पात्र उम्मीदवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नई अंतरिम याचिका दायर कर सेवा अवधि बढ़ाने की मांग की गई।
बीमारी के कारण नहीं हो सकी सुनवाई
नई अंतरिम याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ के समक्ष होनी थी। लेकिन बीमारी के कारण उनके सुनवाई में शामिल नहीं हो पाने के चलते मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुना गया।
सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में पात्र उम्मीदवारों को प्रक्रिया पूरी होने तक काम करने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया।
नया आदेश जारी करने की जरूरत नहीं
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने फिलहाल कोई नया आदेश जारी नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि नई अंतरिम याचिका दायर हो चुकी है, इसलिए पहले का आदेश 31 अगस्त तक या नई याचिका की सुनवाई होने तक लागू रहेगा।
इसका मतलब है कि नई याचिका पर सुनवाई होने तक पात्र उम्मीदवारों की सेवाओं पर तत्काल कोई संकट नहीं है।
26 हजार कर्मचारियों को मिली अस्थायी राहत
इस आदेश से उन पात्र उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है, जिनकी नौकरी SSC भर्ती मामले में विवाद के कारण प्रभावित हुई थी। हालांकि, यह राहत अंतिम फैसला नहीं है। आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट भर्ती प्रक्रिया और पात्र उम्मीदवारों की सेवा को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे सकता है।
इस बीच नौकरी बचाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों में भी अदालत के इस रुख से राहत की उम्मीद जगी है







