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देश सेवा में न्योछावर हुआ भोजपुर का बेटा, असम विमान हादसे में शहीद हुए अग्निवीर दानिश आलम..तिरंगे में लिपटकर लौटेंगे घर

Assam Plane Crash: देश की सेवा में तैनात दानिश आलम अब तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटेंगे. हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव और आसपास के क्षेत्रों में मातम पसरा हुआ है.
 
ASSAM PLANE CRASH

Assam Plane Crash: असम में हुए विमान हादसे में बिहार के भोजपुर जिले के अग्निवीर जवान दानिश आलम के शहीद होने की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है. देश की सेवा में तैनात दानिश आलम अब तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटेंगे. हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव और आसपास के क्षेत्रों में मातम पसरा हुआ है.

असम विमान हादसे में बिहार का लाल अग्निवीर दानिश शहीद, आर्थिक तंगी से लड़कर पाई थी नौकरी

दानिश आलम ने अग्निवीर के रूप में भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा का सपना पूरा किया था. उनके शहीद होने की खबर से भोजपुर समेत पूरे बिहार में शोक और गर्व का माहौल है. स्थानीय लोगों ने उन्हें बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ जवान बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है.

Danish Alam

भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड निवासी अग्निवीर दानिश आलम के शहीद होने की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. हादसे में दो अधिकारियों और दो अग्निवीर समेत कुल पांच वायुसेना कर्मियों के शहीद होने की सूचना है.

मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना का एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान जोरहाट वायुसेना एयरफील्ड पर उतरने का प्रयास कर रहा था. इसी दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गई. घटना के बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक पांच वायुसेना कर्मियों की मौत हो चुकी थी.

शहीद दानिश आलम भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड अंतर्गत कायमनगर गांव के निवासी थे. वह भारतीय वायुसेना में अग्निवीर के रूप में कार्यरत थे और जून 2025 में सेवा में शामिल हुए थे. दानिश के पिता मोहम्मद फार्रुक आलम गीधा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक वर्कशॉप में काम करते हैं, जबकि माता अख्तरी बेगम गृहिणी हैं. परिवार में दो बड़ी बहनें शगुफ्ता परवीन और गजला परवीन हैं. दानिश अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे.

 परिवार में मचा कोहराम

घर का इकलौता चिराग बुझा

दानिश के शहीद होने की खबर जैसे ही कायमनगर पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया. परिजन और ग्रामीण उनके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधाने लगे. बेटे की शहादत की खबर सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई. ग्रामीणों के अनुसार दानिश बचपन से ही मेधावी और देशसेवा के प्रति समर्पित था. उसका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था, जिसे उसने अपनी मेहनत और लगन से पूरा किया.

अग्निवीर के रूप में चयन होने के बाद दानिश को बिहटा एयरफोर्स स्टेशन से प्रशिक्षण के लिए कर्नाटक के बेलगांव भेजा गया था. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी तैनाती असम के जोरहाट में की गई थी, जहां वह अक्टूबर 2025 से कार्यरत थे.

दो सप्ताह पहले ही आए थे घर

परिजनों ने बताया कि दानिश 23 मई को छुट्टी लेकर घर आए थे और एक सप्ताह परिवार के साथ बिताने के बाद 30 मई को वापस ड्यूटी पर लौट गए थे. किसी ने नहीं सोचा था कि छुट्टी के बाद गया बेटा अगली बार तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा.