अरविंद केजरीवाल को बड़ा राजनीतिक झटका: राघव चड्डा समेत कई सांसदों की BJP में एंट्री, AAP में बगावत
Raghav Chadha Left AAP Sandeep Pathak Ashok Mittal Will Join BJP: राजनीति कैसी भी हो इसे समझ पाना या इससे बचना एक भंवर की तरह है. आप जितना इससे बचना चाहेंगे इसमें और उलझते ही जाएंगे और जब घायल शेर की बात हो तो घायल शेर हमेशा ही खतरनाक साबित होता है. इस बात से बात समझ ही चुके होंगे की यहां किनकी बात हो रही है. जी हां, हम राघव चड्ढा की बात कर रहे हैं. ये राजनीति के भंवर के एक ऐसे चेहरे हैं जिन्होंने संसद में हर वो मुद्दा उठाया जिनपर कभी किसी नेता की नज़र नहीं गई या यूं कह लीजिये जिन्हे आम आदमी के मुद्दे से कोई सरोकार नहीं रहा हो. ये एक ऐसे चहरे हैं जिन्होंने आम आदमी की छोटी सी छोटी परेशानी को संसद में उठाया। खैर अंत में इन्हें मिला क्या? पार्टी से निष्काषित करने का रास्ता...
आम आदमी पार्टी के भीतर भी ऐसा ही एक भूचाल आया है, जिसने पूरी दिल्ली की राजनीति को हिलाकर रख दिया है. राघव चड्ढा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पार्टी की नींव में पड़ी दरारों को सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया है. यह आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के लिए किसी सदमे से कम नहीं है. चलिए जानें कि क्या इससे पार्टी टूट जाएगी और क्या केजरीवाल इसके खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं?
आम आदमी पार्टी (AAP) संसदीय दल में टूट सामने आई है.राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दो तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है. संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने शुक्रवार को कहा, "हमने यह फैसला किया है कि हम, यानी राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में मिला लेंगे।"
जिस पार्टी को 15 साल दिए वो रास्ते से भटक गईः राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने कहा, "जिस AAP को मैंने 15 सालों तक अपने खून से सींचा वह अपने रास्ते से भटक गई है. अब यह देशहित के लिए नहीं बल्कि अपने निजी फायदों के लिए काम कर रही है. मैं AAP से दूर जा रहा हूं और जनता के पास आ रहा हूं... हम सभी ने मिलकर इस पार्टी को दिल्ली, पंजाब और देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाने का प्रयास किया था.

राघव चड्ढा ने कहा, "जिस AAP को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है। अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फ़ायदे के लिए काम करती है।"
राघव चड्ढा बोले मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं
राघव चड्ढा ने कहा, "पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं। इसलिए, आज हम यह घोषणा करते हैं कि मैं AAP से खुद को अलग कर रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।" राघव चड्ढा ने कहा, "हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसद, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो जाएंगे।"
अब सवाल यह उठता है कि क्या आम आदमी पार्टी इस बगावत को कानूनी तौर पर रोक सकती है? भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे आमतौर पर 'दलबदल विरोधी कानून' के रूप में जाना जाता है, इस पूरे प्रकरण का केंद्र है. नियम यह है कि यदि किसी भी पार्टी के दो-तिहाई या उससे अधिक सदस्य अलग होकर किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. चूंकि यहां 10 में से 7 सांसद साथ हैं, इसलिए तकनीकी रूप से यह विलय संवैधानिक रूप से वैध माना जा रहा है.
इन 7 सांसदों ने आम आदमी पार्टी को कहा अलविदा
- राघव चड्ढा
- संदीप पाठक
- अशोक मित्तल
- हरभजन सिंह
- राजेंदर गुप्ता
- विक्रम साहनी
- स्वाति मालीवाल
राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आप के 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से ज्यादा सांसद इस मुहिम में हमारे साथ हैं। उन्होंने पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं, और आज सुबह हमने सभी जरूरी दस्तावेज, जिनमें हस्ताक्षरित पत्र और अन्य औपचारिक कागज़ात शामिल हैं, राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए हैं। जैसा कि मैंने बताया, दो-तिहाई से ज़्यादा सांसद हमारा समर्थन कर रहे हैं और हम जल्द ही आपको पूरी सूची उपलब्ध करा देंगे। उनमें से तीन सांसद अभी आपके सामने यहां मौजूद हैं। इनके अलावा, विश्व-स्तरीय क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें लग रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। इसी वजह से उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है.

संदीप पाठक बोले- कभी सोचा नहीं था कि ऐसा दिन भी आएगा
वहीं, संदीप पाठक ने कहा, "मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि ऐसा समय भी आएगा, लेकिन आज वह स्थिति सामने है। आज मैं आम आदमी पार्टी से अपने सभी रिश्ते समाप्त करने की घोषणा करता हूं। मैं एक किसान परिवार से आता हूं। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई-लिखाई की और हमेशा एक ही उद्देश्य रहा, देश के लिए कुछ सार्थक करना।"

क्या अरविंद केजरीवाल इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं? कानून के जानकारों का मानना है कि केजरीवाल के लिए यह रास्ता बेहद चुनौतीपूर्ण है. अदालत में तब तक कोई ठोस राहत मिलना मुश्किल है, जब तक यह साबित न हो जाए कि सांसदों के हस्ताक्षर फर्जी थे या उन्हें किसी तरह के दबाव में पार्टी छोड़ने का यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया है. जब तक कोई गंभीर वैधानिक उल्लंघन साबित नहीं होता, तब तक संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस विलय को रोकना किसी भी अदालत के लिए एक कठिन कानूनी परीक्षा होगी.







