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बंगाल में UCC पर बड़ा अपडेट! विधानसभा सत्र में पेश हो सकता है बिल

Kolkata: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अगले सप्ताह सोमवार को विधानसभा एक विशेष सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश कर सकती है. यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा भाजपा शासित राज्य बन जायेगा. सरकार का दावा है कि इस कानून से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन...
 
WEST BENGAL

Kolkata: पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान इस विषय से जुड़ा एक विधेयक पेश कर सकती है. हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

preparations to introduce ucc bill in west bengal by bjp government draft  to be tabled in assembly - Prabhasakshi latest news in hindi

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राज्य में समान नागरिक संहिता से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा और स्पष्टता लाना है. यदि यह विधेयक सदन में पेश होता है, तो इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अगले सप्ताह सोमवार को विधानसभा एक विशेष सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश कर सकती है. यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा भाजपा शासित राज्य बन जायेगा. सरकार का दावा है कि इस कानून से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी तथा महिलाओं के अधिकार और लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी.

समान नागरिक संहिता पर बड़ा कदम, पश्चिम बंगाल में पेश हो सकता है बिल

असम मॉडल पर आगे बढ़ने की तैयारी

हाल ही में असम विधानसभा में लंबी बहस के बाद यूसीसी विधेयक पारित हुआ है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इसे केवल भाजपा का राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में निहित एक लंबे समय से लंबित लक्ष्य बताया था. उन्होंने यह भी कहा था कि स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा की चर्चाओं में कांग्रेस के कई नेताओं ने भी समान नागरिक संहिता का समर्थन किया था. असम के कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और बहुविवाह पर रोक जैसे प्रावधान शामिल किये गये हैं. सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है.

असम की तरह पश्चिम बंगाल सरकार भी कुछ विशेष समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर विचार कर रही है. सूत्रों के अनुसार, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र और जंगलमहल के कुछ जनजातीय समुदायों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किये जा सकते हैं. हालांकि, अंतिम निर्णय विधेयक पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगा.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी विधेयक पेश होने पर यह राज्य की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन सकता है. भाजपा इसे महिलाओं के अधिकार, समान कानून और सुशासन से जोड़कर जनता के सामने रखेगी, जबकि विपक्ष धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाकर इसका विरोध कर सकता है. जबकि, भाजपा नेतृत्व का कहना है कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करने का संवैधानिक प्रयास है. इसी उद्देश्य के तहत अब पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाये जा रहे हैं. उधर, यूसीसी को लेकर राज्य के विपक्षी दलों ने पहले से ही विरोध के संकेत दिये हैं.