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मिशन-2027 के लिए बीजेपी ने कसी कमर, क्षेत्रीय प्रभारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी; कई जिलों में टीम का इंतजार

 
मिशन-2027 के लिए बीजेपी ने कसी कमर, क्षेत्रीय प्रभारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी; कई जिलों में टीम का इंतजार

UP News: उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। प्रदेश टीम के गठन के बाद अब क्षेत्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों के सह प्रभारियों को कई-कई जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, प्रदेश के कई सांगठनिक जिलों में जिलाध्यक्ष घोषित होने के बावजूद उनकी टीम का गठन अभी तक नहीं हो सका है। इससे संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है।

प्रयागराज क्षेत्र में वरुण चौधरी को 12 जिलों की जिम्मेदारी

प्रयागराज क्षेत्र के सह प्रभारी वरुण चौधरी को 12 जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। उनके दायरे में वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अमेठी और सुल्तानपुर शामिल हैं।

बुंदेलखंड में जगदीश चंदर जांगिड़ संभालेंगे 13 जिले

बुंदेलखंड क्षेत्र के सह प्रभारी जगदीश चंदर जांगिड़ को कानपुर समेत 13 जिलों की जिम्मेदारी मिली है। इनमें कानपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, औरैया, जालौन, महोबा, झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर, हमीरपुर और इटावा शामिल हैं।

ब्रज क्षेत्र में कुणाल चौधरी के जिम्मे 13 जिले

ब्रज क्षेत्र के सह प्रभारी कुणाल चौधरी को भी 13 जिलों का जिम्मा दिया गया है। उनकी जिम्मेदारी में मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कासगंज, अलीगढ़, हाथरस, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और फर्रुखाबाद शामिल हैं।

पश्चिमी यूपी में संजीव आर्य के पास 14 जिले

पश्चिमी क्षेत्र के सह प्रभारी संजीव आर्य को सबसे ज्यादा 14 जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। उनके क्षेत्र में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, संभल, मेरठ, बिजनौर, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और गौतम बुद्ध नगर शामिल हैं।

कई जिलों में जिलाध्यक्ष बने, लेकिन टीम का इंतजार

वहीं, भाजपा के सामने संगठनात्मक स्तर पर एक चुनौती भी बनी हुई है। प्रदेश के आठ-नौ सांगठनिक जिलों में जिलाध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है, लेकिन उनकी टीम अभी तक घोषित नहीं की गई है। इनमें हाथरस, अंबेडकर नगर, देवरिया, चंदौली और गोरखपुर महानगर समेत अन्य जिले शामिल बताए जा रहे हैं।

टीम के गठन में देरी का असर संगठन के कामकाज पर भी पड़ रहा है। नए पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण कई जिलों में पार्टी के अभियान और कार्यक्रम अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। वहीं, मौजूदा पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर अनिश्चितता के बीच संगठनात्मक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की बात सामने आ रही है।

जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों का दौर जारी

नई जिला टीम में अपने पसंदीदा चेहरों को जगह दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों की ओर से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर संभावित पदाधिकारियों के नामों को लेकर मंथन और सिफारिशों का दौर जारी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक अधिकांश लंबित जिला इकाइयों को लेकर संगठन स्तर पर काफी होमवर्क पूरा किया जा चुका है।

बूथ तक संगठन मजबूत करने की तैयारी

भाजपा ने उत्तर प्रदेश को 98 संगठनात्मक जिलों में बांट रखा है। पार्टी की रणनीति प्रदेश से लेकर क्षेत्र, जिला, मंडल और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने की है। ऐसे में जिला टीमों का गठन मिशन-2027 की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले करीब 10 दिनों में क्षेत्रीय टीमों और लंबित जिला इकाइयों के गठन का काम काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। इसके बाद भाजपा का फोकस संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करने पर रहेगा।