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पश्चिम बंगाल में BJP सरकार का पेंशन वादा अधूरा, 1000 की जगह अब 1500 रुपये; 82 लाख लोगों को बड़ा झटका

 
पश्चिम बंगाल में BJP सरकार का पेंशन वादा अधूरा, 1000 की जगह अब 1500 रुपये; 82 लाख लोगों को बड़ा झटका

 

 

 

Kolkata News: पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी तो की है, लेकिन चुनाव से पहले किए गए अपने बड़े वादे को फिलहाल पूरा नहीं किया। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले पेंशन को दोगुना कर 1,000 रुपये से 2,000 रुपये प्रतिमाह करने का वादा किया था। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह करने का फैसला किया है।

सोमवार, 7 सितंबर को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने करीब 82 लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में बढ़ी हुई पेंशन की राशि ट्रांसफर की। सरकार के मुताबिक इस बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर हर साल करीब 6,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

आर्थिक संकट का हवाला, सीएम बोले- अभी दोगुनी नहीं कर सकते पेंशन

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पेंशन की राशि 2,000 रुपये नहीं किए जाने के पीछे राज्य की वित्तीय स्थिति को वजह बताया। नबन्ना में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान वित्तीय अनियमितताओं, राजस्व नुकसान और केंद्र की योजनाओं में पर्याप्त भागीदारी नहीं होने के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक इस स्थिति को सुधारने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है। इसी वजह से फिलहाल चुनाव से पहले किए गए वादे के मुताबिक पेंशन राशि को दोगुना करना संभव नहीं हो पाया है।

हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में पेंशन की रकम में और बढ़ोतरी की जाएगी।

पुरानी वेटिंग लिस्ट खत्म, नए लोगों को मिलेगा आवेदन का मौका

सरकार ने पेंशन योजना को लेकर एक और बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकार के समय तैयार की गई पेंशन लाभार्थियों की वेटिंग लिस्ट को रद्द कर दिया गया है।

अब जिन पात्र लोगों को अभी तक पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, वे नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में आयोजित होने वाले ‘जन कल्याण शिविरों’ के जरिए आवेदन कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि जांच के बाद पात्र आवेदकों को जल्द लाभार्थी सूची में शामिल किया जाएगा।

जांच में हजारों अपात्र लाभार्थी मिले

सरकार मौजूदा पेंशन लाभार्थियों की सूची की भी जांच कर रही है। इसकी वजह योजना में अपात्र लोगों के शामिल होने की शिकायतें बताई गई हैं।

मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में करीब 4.43 लाख लाभार्थियों में से अब तक 60 फीसदी की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में करीब 25 हजार लोग अपात्र पाए गए हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगभग 5 लाख लाभार्थियों के अपात्र पाए जाने की बात सामने आई है।

सरकार का कहना है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लोगों को योजना का लाभ देने पर फोकस किया जाएगा।

चुनावी वादे और मौजूदा पेंशन के बीच कितना अंतर?

भाजपा ने चुनाव से पहले बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए मौजूदा 1,000 रुपये की पेंशन को सीधे 2,000 रुपये प्रति माह करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद पहली बढ़ी हुई किस्त में पेंशन 1,500 रुपये हुई है।

यानी लाभार्थियों को फिलहाल वादे की गई राशि से 500 रुपये कम मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार 2,000 रुपये की पेंशन का अपना चुनावी वादा कब तक पूरा करती है।