ब्रिटेन के सांसद का बड़ा बयान: ‘पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, पाकिस्तान का कब्जा अवैध’
National News: ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बार फिर दो टूक और मजबूत बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि पूरा जम्मू और कश्मीर भारत में मिलाया जाना चाहिए और इसके कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का कब्जा पूरी तरह अवैध है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ब्लैकमैन ने न सिर्फ पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए, बल्कि अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का भी खुलकर समर्थन किया।
ब्लैकमैन ने कहा कि वह हाल के वर्षों में नहीं, बल्कि दशकों से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के पक्षधर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने बताया, “मैंने सिर्फ तब यह बात नहीं कही जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया। मैं तो 1992 से ही इसका समर्थन करता रहा हूं, उस समय जब कश्मीरी पंडितों को जम्मू-कश्मीर से जबरन बाहर किया जा रहा था।”
कश्मीरी पंडितों के पलायन को बताया बड़ा अन्याय
ब्रिटिश सांसद ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि तब कई बैठकें की गई थीं, ताकि दुनिया को बताया जा सके कि धर्म के आधार पर लोगों को उनके पुश्तैनी घरों से निकालना कितना बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा आतंकवाद के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर रियासत पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे का भी विरोध किया है।
ब्लैकमैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं शुरू से यह कहता आया हूं कि जम्मू और कश्मीर रियासत को भारत के शासन के तहत फिर से एक किया जाना चाहिए।”
पहले भी दे चुके हैं ऐसा बयान
यह पहली बार नहीं है जब बॉब ब्लैकमैन ने इस तरह की बात कही हो। साल 2016 में एक इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी बलों ने जम्मू और कश्मीर के हिस्से पर गैरकानूनी कब्जा कर रखा है और उन्हें वहां से हट जाना चाहिए। उन्होंने उस समय भी पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने की बात कही थी।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर जोर
ब्लैकमैन ने यह भी सुझाव दिया कि भारत सरकार को कम से कम दो स्मार्ट सिटी विकसित करनी चाहिए, ताकि आंतरिक रूप से विस्थापित कश्मीरी पंडितों को वापस लौटने और नई जिंदगी शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया बेहद सतर्कता से होनी चाहिए, ताकि अतीत जैसी त्रासद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
ब्रिटिश सांसद के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के पक्ष को मजबूती देने वाला माना जा रहा है और इससे जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर एक बार फिर वैश्विक बहस तेज हो सकती है।







