इथेनॉल विवाद के बीच नितिन गडकरी का बड़ा बयान, बोले- E20 से इंजन खराब होने का दावा बेबुनियाद, माइलेज पर पड़ सकता है हल्का असर
Nitin Gadkari On E20 Fuel Controversy: देशभर में E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. हालांकि सरकार का कहना है कि इसके बावजूद E20 के फायदे इसके संभावित नुकसान से कहीं अधिक हैं.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी E20 पेट्रोल का बचाव करते हुए कहा कि इसे लेकर कई भ्रामक दावे किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ऐसा कोई उदाहरण है, जिसमें E20 के कारण किसी वाहन का इंजन खराब हुआ हो, तो उसे सामने लाया जाए. गडकरी ने दोहराया कि E20 से इंजन को नुकसान होने के दावों का कोई ठोस प्रमाण नहीं है.

इस बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जारी स्पष्टीकरण में कहा कि E20 पेट्रोल के कारण कुछ वाहनों की ईंधन दक्षता (फ्यूल इकॉनमी) में 3-5% तक कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है. हालांकि मंत्रालय के अनुसार इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटता है, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है और किसानों को इथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है.
बिहार के पॉपुलर यूट्यूबर मनीष कश्यप के दावों ने जैसे आग में घी का काम किया और जब विवाद ज्यादा गहरा गया तो अब केंद्र की मोदी सरकार के एक अहम बाद स्वीकार की है. जी हां, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माना कि ई20 पेट्रोल से माइलेज पर हल्का असर होता है, लेकिन पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों के इंजन में कोई खराबी नहीं आती.

गाड़ियों के माइलेज पर कितना असर
केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में स्वीकार किया कि इथेनॉल का कैलोरिफिक वैल्यू पेट्रोल से कम होता है, जिसके कारण माइलेज में मामूली गिरावट आ सकती है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रभाव बहुत ज्यादा नहीं है. सिटी ड्राइविंग कंडीशन (जैसे दिल्ली-मुंबई समेत अन्य महानगरों में ट्रैफिक में बार-बार ब्रेक लगाना) में माइलेज का अंतर ड्राइविंग स्टाइल पर ज्यादा निर्भर करता है, न कि केवल फ्यूल पर. ऐसे में जिस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं कि ई20 से 20-40 फीसदी तक माइलेज घट गया है, यह भ्रामक है.
हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर सवाल उठे हैं. इस विवाद के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 नीति ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जैव ईंधन को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है. साथ ही वाहन निर्माताओं और उपभोक्ताओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लगातार तकनीकी संवाद भी जारी है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ‘इंजन में खराबी की खबरें को भ्रामक बताया’
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने की जो खबरें चल रही हैं, इससे गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिशें हो रही हैं.
- उन्होंने कहा कि E20 को ARAI और वाहन बनाने वाली कंपनियों द्वारा कड़े परीक्षणों के बाद ही मंजूरी दी गई है. गड़करी ने चुनौती दी कि कोई एक भी कार दिखाएं, जो E20 ईंधन के कारण खराब हुई हो. गडकरी की मानें तो कुछ मामलों में जांच के बाद पता चला कि इंजन की खराबी का कारण मिलावटी ईंधन था, न कि E20 फ्यूल.
- आपको बता दें कि हाल ही में यूट्यूबर मनीष कश्यप ने ई20 फ्यूल से अपनी टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस खराब होने का दावा किया और इसे लेकर नितिन गडकरी को जमकर कोसा, जिसके बाद ई20 फ्यूल को लेकर विवाद काफी ज्यादा फैल गया और सरकार को इस मामले में अब जवाब देना पड़ रहा है.
पुरानी गाड़ियों के मालिक क्या करें
ई20 फ्यूल से माइलेज और इंजन पर असर को लेकर स्पष्टीकरण जारी करने के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह भी बताया कि पुरानी गाड़ियों के लिए वाहन निर्माताओं को सर्विसिंग के दौरान वॉशर बदलने के निर्देश दिए गए हैं, जो कस्टमर के लिए पूरी तरह फ्री हैं. अब ये वॉशर रबर के बनाए जा रहे हैं, ताकि वे इथेनॉल के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें.
फ्लेक्स फ्यूल पर क्या?
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आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार ब्राजील के मॉडल को भारत में भी अपना रही है, जहां ग्राहकों को ईंधन चुनने की आजादी है. टाटा, महिंद्रा, हुंडई, टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक ला रही हैं, जो E20 से ऊपर के मिश्रण पर भी चल सकती हैं, यानी पेट्रोल में 85 फीसदी इथेनॉल मिलाकर, या 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने में सक्षम.
बायो-फ्यूल पर जोर और किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश
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- इन सबके बीच आपके लिए यह जानना जरूरी है कि नरेंद्र मोदी सरकार ऑयल इंपोर्ट कम करने की कोशिश कर लाखों करोड़ों रुपये विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश में है.
- इस बाबत इथेनॉल के साथ ही मेथनॉल और आइसो-ब्यूटेनॉल जैसे स्वदेशी ईंधन विकल्पों का जिक्र हो रहा है, जो ना सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि प्रदूषण भी कम करते हैं.
- नितिन गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन का लक्ष्य देश की आयात निर्भरता को खत्म करना और किसानों की आय बढ़ाना है. हम विदेशी ईंधन नहीं चाहते, हम स्वदेशी ईंधन चाहते हैं.
- केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद ग्राहकों को विकल्प देना और प्रदूषण मुक्त भारत बनाना है. आने वाले समय में निर्माण उपकरणों और सार्वजनिक परिवहन (बसों-ट्रकों) के लिए मेथनॉल और आइसो-ब्यूटेनॉल का उपयोग एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा.







