कानपुर नगर निगम में सीएम योगी की सख्ती का असर, ठेकेदारों के भुगतान पर रोक; 7 फर्में ब्लैकलिस्ट
UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद कानपुर नगर निगम में कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है। नगर निगम में ठेकेदारी और विकास कार्यों को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने कई बड़े फैसले लिए हैं। फिलहाल सभी ठेकेदारों के भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी गई है। साथ ही ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन के लिए बनाई गई समिति को भी समाप्त कर दिया गया है।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के मुताबिक नगर निगम की फाइलों और ठेकों की गहन जांच की जा रही है। खास तौर पर हॉट मिक्स प्लांट के जरिए कराए जा रहे कार्यों को जांच के दायरे में रखा गया है। उनका कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सात फर्में ब्लैकलिस्ट
जांच के दौरान नगर निगम ने अब तक सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। संबंधित मामलों में जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि नगर निगम में 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों से जुड़ी फाइलों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच के केंद्र में विशेष रूप से सड़क निर्माण और हॉट मिक्स प्लांट से संबंधित ठेके हैं।
हॉट मिक्स प्लांट के दावों की खुली पोल
जांच के दौरान कई ठेकेदारों ने अपने दस्तावेजों में हॉट मिक्स प्लांट और सड़क निर्माण के लिए जरूरी मशीनरी उपलब्ध होने का दावा किया था। लेकिन अधिकारियों की छापेमारी में कई जगहों पर संबंधित प्लांट और जरूरी उपकरण मौजूद नहीं मिले।
नगर आयुक्त के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त अनूप कुमार समेत अधिकारियों और जोनल अभियंताओं की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया। जहां सड़क निर्माण का दावा किया गया था, वहां भी टीम ने मौके पर जाकर इस्तेमाल की जा रही सामग्री और उपकरणों की जांच की।
रविवार को भी खुला नगर निगम कार्यालय
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद जांच की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार की छुट्टी के बावजूद नगर निगम कार्यालय खोलकर संबंधित फाइलों की पड़ताल की गई। वहीं बड़े ठेके लेने वाली फर्मों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
भौंती इलाके में हुई कार्रवाई के दौरान हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े एक बड़े पदाधिकारी की फर्म की भी जांच की गई। यहां भी अधिकारियों को बताए गए सभी जरूरी उपकरण नहीं मिले।
समिति भी हुई निरस्त
ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन के लिए गठित समिति को भी नगर निगम ने समाप्त कर दिया है। इस समिति में एक अधिशासी अभियंता के अलावा महापौर प्रमिला पांडेय द्वारा नामित दो पार्षद शामिल थे।
दरअसल, नगर निगम में कथित तौर पर ठेकेदारी में अनियमितता और माफियागिरी की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलायुक्त से पूरे मामले को लेकर सवाल किए थे। उन्होंने कथित वसूली और ठेकेदारी व्यवस्था में गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
अब नगर निगम की फाइलों, ठेकों, निर्माण कार्यों और संबंधित फर्मों की जांच आगे बढ़ रही है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को कार्रवाई से बाहर नहीं रखा जाएगा।







