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6 सीटों की हार के बाद कांग्रेस का ‘री-लॉन्च मोड’: चुनावी राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियां गठित, प्रियंका गांधी को असम की कमान

 
6 सीटों की हार के बाद कांग्रेस का ‘री-लॉन्च मोड’: चुनावी राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियां गठित, प्रियंका गांधी को असम की कमान

New Delhi: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस अब आत्ममंथन से आगे बढ़कर संगठनात्मक मोर्चे पर आक्रामक तैयारी में जुट गई है। महज़ 6 सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कोई चूक नहीं की जाएगी। इसी रणनीति के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने देश के कई अहम राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन कर दिया है।

कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से जारी सूचना के मुताबिक केरल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उम्मीदवार चयन को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए ये कमेटियां बनाई गई हैं। पार्टी का फोकस इस बार सिर्फ चुनाव लड़ने पर नहीं, बल्कि जिताऊ चेहरों की पहचान पर है।

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प्रियंका गांधी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

पूर्वोत्तर में कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने के इरादे से प्रियंका गांधी वाड्रा को असम की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ सप्तगिरि शंकर उलाका, इमरान मसूद और डॉ. सिरिवेला प्रसाद को सदस्य बनाया गया है। माना जा रहा है कि प्रियंका की सक्रिय भूमिका से असम में कांग्रेस को नई धार देने की कोशिश की जाएगी।

अनुभवी नेताओं को राज्यों की जिम्मेदारी

केरल के लिए वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ डॉ. सैयद नसीर हुसैन, नीरज डांगी और अभिषेक दत्त को शामिल किया गया है।

वहीं तमिलनाडु और पुडुचेरी की जिम्मेदारी टी.एस. सिंह देव को सौंपी गई है, जिनके साथ यशोमति ठाकुर, जी.सी. चंद्रशेखर और अनिल कुमार यादव काम करेंगे।

किशनगंज सांसद को भी अहम भूमिका

पश्चिम बंगाल के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी की कमान बी.के. हरिप्रसाद को दी गई है। इस टीम में बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद को भी शामिल किया गया है, जो पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक अहम संकेत माना जा रहा है। उनके साथ ममता देवी और बी.पी. सिंह भी सदस्य होंगे।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि संबंधित राज्यों के प्रभारी महासचिव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, कांग्रेस विधायक दल के नेता और एआईसीसी सचिव पदेन सदस्य के तौर पर इन कमेटियों से जुड़े रहेंगे।

आपको बता दें कि, बिहार की हार से सबक लेते हुए कांग्रेस अब संगठन, रणनीति और नेतृत्व-तीनों मोर्चों पर खुद को नए सिरे से तैयार करने में जुट गई है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी फिर से मजबूत वापसी कर सके।