गोरखपुर के कारोबारी से पूछताछ के दौरान हुआ विवाद, एसपी ने लापरवाही पर की बड़ी कार्रवाई
UP News: उत्तर प्रदेश में एक कारोबारी को पूछताछ के लिए बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए साथ ले जाना अंबेडकरनगर की एसओजी टीम को भारी पड़ गया। इस चूक के चलते गोरखपुर और अंबेडकरनगर की एसओजी टीमें आमने-सामने आ गईं और मामला विवाद तक पहुंच गया। घटना के बाद अंबेडकरनगर की पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने कड़ी कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया।
परिजनों ने जताई अपहरण की आशंका
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र के रहने वाले व्यवसायी श्रवण कुमार को अंबेडकरनगर की एसओजी एक मामले में पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई। व्यापारी के अचानक गायब होने पर परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए गोरखपुर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और एसओजी टीम उसकी तलाश में जुट गई।
दोनों जिलों की एसओजी में हुई तीखी बहस
तलाश के दौरान गोरखपुर की एसओजी टीम अंबेडकरनगर के अकबरपुर स्थित पटेलनगर तिराहे पर पहुंची, जहां दोनों जिलों की एसओजी टीमों का आमना-सामना हो गया। व्यापारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और स्थिति हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आ गई।
वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाला मामला
घटना की जानकारी मिलने के बाद गोरखपुर के एसपी डॉ. कौस्तुभ और अंबेडकरनगर की एसपी प्राची सिंह ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। जांच में स्पष्ट हुआ कि व्यापारी को अंबेडकरनगर में दर्ज एक मामले में पूछताछ के लिए लाया गया था, जबकि गोरखपुर पुलिस अपहरण की सूचना के आधार पर कार्रवाई कर रही थी।
चार पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
मामले की समीक्षा के बाद एसपी प्राची सिंह ने स्वाट टीम के प्रभारी उपनिरीक्षक अजीत कुमार पांडे, एसओजी के मुख्य आरक्षी महेश प्रताप सिंह, सर्विलांस सेल के मुख्य आरक्षी मनीष कुमार और मुख्य आरक्षी लल्लू यादव को पुलिस लाइन भेज दिया।
सूचना न देने से पैदा हुआ विवाद
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यदि अंबेडकरनगर की एसओजी व्यापारी को पूछताछ के लिए ले जाने से पहले गोरखपुर की स्थानीय पुलिस को सूचना दे देती, तो यह पूरा विवाद टाला जा सकता था। फिलहाल इस घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।







