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दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत ने अभिजीत दीपके-सौरभ समेत 6 पर कराया केस

दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह और स्वतंत्र पत्रकार रोजी व गजेंद्र सिंह के खिलाफ एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज किया है.
 
Deepke

दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह और स्वतंत्र पत्रकार रोजी व गजेंद्र सिंह के खिलाफ एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज किया है. 13 अक्टूबर को विवेक भगत की शिकायत पर, उनके ऊपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार और अन्य के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी (एससी-एसटी एक्ट) और सरकारी कामकाज में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है.

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब-डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि एसीपी के लिए अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच के आधार पर होगी.

दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत DANIPS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली पुलिस सेवा) कैडर के अधिकारी हैं और वर्तमान में कनॉट प्लेस सब-डिवीजन में सहायक पुलिस कमिश्नर (एसीपी) के रूप में तैनात हैं. 5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली सरकार ने DANIPS कैडर के 12 अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी का अतिरिक्त कार्यभार देने का आदेश जारी किया था, जिसमें विवेक भगत भी शामिल थे.

जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर उठे विवाद के बाद, विवेक भगत ने खुद दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर जांच पूरी होने तक यह अतिरिक्त कार्यभार न लेने का अनुरोध किया था, जिसके बाद सरकार ने उनके आदेश पर रोक लगा दी थी. वह हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान उपजे गंभीर विवादों और कानूनी मामलों को लेकर काफी चर्चा में हैं.

अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी एसीपी विवेक भगत और उनकी टीम के पास थी. प्रदर्शन के दौरान एक स्वतंत्र महिला पत्रकार (रोजी) ने एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए थे. इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब 13 अक्टूबर 2026 को संसद मार्ग थाने में एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर महिला पत्रकार रोजी, पत्रकार गजेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. 

विवेक भगत (जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं) ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी नेमप्लेट देखकर उनकी जाति (मेघ/मेघवाल) पर सार्वजनिक रूप से अपमानजनक और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं. पुलिस ने इस शिकायत पर एससी-एसटी एक्ट और सरकारी काम में बाधा डालने (बीएनएस की धारा 221) के तहत मामला दर्ज किया है. 

इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक फर्जी वीडियो भी वायरल किया गया था, जिसे असली सीसीटीवी फुटेज की तरह दिखाया गया था. इसमें पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति को महिला से गलत व्यवहार करते हुए दिखाया गया था और साथ में विवेक भगत का नाम-पद इस्तेमाल था. दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जांच में इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निर्मित मनगढ़ंत वीडियो पाया और इसे फैलाने के आरोप में नदीम अहमद नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है.