कारीगरों को श्रमिक नहीं, उद्यमी बनाने पर जोर, सीएम योगी बोले- प्रशिक्षण से लेकर 10 लाख तक का ऋण दे रही सरकार
UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार प्रशिक्षण, टूलकिट और बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य कारीगरों को केवल श्रमिक के रूप में नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी और वीएसएसवाई 2.0 मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों के लाभार्थियों को टूलकिट और स्वरोजगार के लिए चेक भी वितरित किए।
पिछली सरकारों पर सीएम योगी ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारों को सैफई में महोत्सव आयोजित करने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर जन्मदिन मनाने से फुर्सत नहीं थी, तब कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों के बारे में सोचने का समय कहां से आता। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पारंपरिक कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और उन्हें बाजार से जोड़ने पर काम किया है।
योगी ने कहा कि वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना शुरू की गई और वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना लागू की गई। उनके अनुसार इन योजनाओं के जरिए कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
छह लाख से ज्यादा कारीगरों को मिली टूलकिट
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम पारंपरिक हुनर को नई तकनीक और बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के कारीगर उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके मुताबिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।
बाजार और बैंकिंग से दूरी ने कारीगरों को किया कमजोर: योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय भारत का कारीगर उद्यमी हुआ करता था और हस्तशिल्पी अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर था। उनके अनुसार समय के साथ कारीगर बाजार, बैंकिंग व्यवस्था और नई तकनीक से दूर होते गए। इससे कई कारीगरों को अपने पारंपरिक काम से हटकर मजदूरी की ओर जाना पड़ा।
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों की स्थिति में बदलाव लाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह व्यवस्था बनाने की कोशिश की कि कारीगर को प्रशिक्षण लेने के दौरान भी आर्थिक मदद मिले और प्रशिक्षण के बाद उसे अपना काम शुरू करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हों।
10 दिन की ट्रेनिंग, ₹5 हजार मानदेय और ₹15 हजार तक की टूलकिट
मुख्यमंत्री के मुताबिक विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत कारीगरों को 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान ₹5,000 का मानदेय दिया जाता है, जबकि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ₹15,000 तक की टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आज के बाजार और ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक विकसित करना है, ताकि कारीगर अपने उत्पादों की गुणवत्ता और आय दोनों बढ़ा सकें।
16 से बढ़कर 25 हुए ट्रेड
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना की शुरुआत 16 ट्रेड से हुई थी, लेकिन अब इसका विस्तार कर 25 ट्रेड किए गए हैं। पारंपरिक कामों में बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी शामिल हैं।
नए जोड़े गए ट्रेड में मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा शामिल हैं। इसके अलावा युवाओं की जरूरत और रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत, विद्युत उपकरण रिपेयर, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे काम भी योजना में शामिल किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी ट्रेड का उद्देश्य कारीगरों और युवाओं को अपने हुनर के आधार पर स्वरोजगार का अवसर देना है।
कारीगरों को 10 लाख रुपये तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण
योगी ने कहा कि कारीगरों को प्रशिक्षण और टूलकिट देने के साथ बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना भी जरूरी है। उनके अनुसार सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को ₹5 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण दिया जा रहा है, जबकि कारीगरों के लिए यह सीमा ₹10 लाख तक रखी गई है।
उन्होंने बताया कि ऋण के साथ 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की व्यवस्था भी है। मुख्यमंत्री ने बैंकों से कारीगरों को ऋण उपलब्ध कराने और सरकार द्वारा ब्याज का भार उठाने की बात कही।
25 से 29 सितंबर तक जिलों में टूलकिट और ऋण वितरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में टूलकिट वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में कारीगरों को टूलकिट के साथ बैंक ऋण से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार किसी कारीगर को ₹1 लाख, किसी को ₹2 लाख तो किसी को ₹8 लाख तक का ऋण मिल सकता है। इन कार्यक्रमों में बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में लाभार्थियों को ऋण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
यूपी में 96 लाख MSME यूनिट का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को बढ़ावा देने वाली नीतियों का असर अर्थव्यवस्था में भी दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में अब 96 लाख MSME इकाइयां हैं, जिनसे करीब 3.25 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि उनके मुताबिक प्रदेश के पास बड़ी आबादी, उपजाऊ जमीन, जल संसाधन और युवा आबादी जैसी क्षमताएं मौजूद थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
योगी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं था, बल्कि इसे संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी। यह मुख्यमंत्री का पिछली सरकारों को लेकर किया गया राजनीतिक आरोप था।
25 सितंबर से ग्रेटर नोएडा में यूपी ट्रेड शो
मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश ट्रेड शो आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों के उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार ट्रेड शो में 2,500 से अधिक एग्जिबिटर्स और 650 से ज्यादा विदेशी खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने अनुमान जताया कि ट्रेड शो में ₹12 हजार करोड़ से ₹15 हजार करोड़ तक का कारोबार हो सकता है।
125 स्टॉल में दिखेगी कारीगरों और योजनाओं की तस्वीर
विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 की प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर तक आयोजित की जा रही है। इसमें ODOP, ODOC, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, MSME, सेक्टर स्किल काउंसिल, फ्रेंचाइजी ब्रांड और बैंक से जुड़े 125 स्टॉल लगाए गए हैं।
प्रदर्शनी में 25 ट्रेड से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार, तकनीकी उन्नयन, बाजार की मांग, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, पैकेजिंग और मार्केटिंग को लेकर जानकारी दी जा रही है। इस दौरान कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू भी किए गए।
लाभार्थियों को टूलकिट और स्वरोजगार के लिए चेक
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को टूलकिट वितरित की। इनमें अयोध्या के श्रवण कुमार और राम तीरथ, बाराबंकी के राम जयसवाल और वंदना, उन्नाव के रंजीत, हरदोई के बाबूराम, कानपुर के शिवसेवक और अवधेश, रायबरेली के शाहिद खान, इटावा के विजयपाल और लखनऊ के मनीष शामिल रहे।
स्वरोजगार के लिए लखनऊ के प्रकाश दीन साहू को ₹8 लाख, राहुल कुमार को ₹1 लाख और मोहम्मद मुस्ताक को ₹2 लाख का चेक दिया गया। वहीं उन्नाव के रामबाबू को ₹1.50 लाख और आनंद कुमार को ₹1 लाख का चेक वितरित किया गया।
भूपेंद्र चौधरी बोले- आधुनिक तकनीक से जोड़े जाएंगे कारीगर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से जोड़ने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ODOP के जरिए कारीगरों को नए बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में पारंपरिक के साथ आधुनिक व्यवसायों को भी शामिल किया गया है। योजना के तहत प्रशिक्षण और टूलकिट के अलावा उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
भूपेंद्र चौधरी के अनुसार प्लेज योजना के तहत 14 जिलों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि स्वीकृत की जा चुकी है और इनमें 668 भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं।
कार्यक्रम में MSME विभाग के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव MSME शशि भूषण लाल सुशील, SLBC के कन्वीनर शैलेंद्र कुमार सिंह, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग विजेंद्र पांडियन सहित कारीगर और हस्तशिल्पी मौजूद रहे।







