Newshaat_Logo

नाना पाटेकर को अंतिम विदाई! ‘नाना अमर रहें’ के नारों से गूंजा पुणे, उमड़ा जनसैलाब

Mumbai:  दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के पुणे जिले के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने मुखाग्नि दी. अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे और ‘नाना अमर रहें’ के नारे लगाए. अभिनेता के सहयोगियों के अनुसार, नाना पाटेकर की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार फार्महाउस में किया जाए. 
 
NANA PATEKAR

Mumbai:  हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के पुणे जिले के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस में अंतिम संस्कार किया गया। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने मुखाग्नि दी। अभिनेता के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से अपने चहेते कलाकार को विदाई दी। इस दौरान लोगों ने ‘नाना अमर रहें’ के नारे भी लगाए।

पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर, राजकीय सम्मान के साथ किया गया विदा Nana  Patekar death updates live anupam kher cried Sayaji Shinde arrives at Goa  hospital last rites today - entertainment

फार्महाउस में अंतिम संस्कार की थी इच्छा

नाना पाटेकर के सहयोगियों के मुताबिक, अभिनेता की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार उनके फार्महाउस में किया जाए। इसी इच्छा के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर गुरुवार रात गोवा से पुणे लाया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पार्थिव शरीर के पुणे पहुंचने के दौरान हवाई अड्डे पर मौजूद थे। इसके बाद पार्थिव शरीर को सिंहगढ़ किले के पास स्थित डोंजे गांव के फार्महाउस ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

अजीत समाचार

अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और मुरलीधर मोहोल, राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल, उदय सामंत और माधुरी मिसाल, लोकसभा सदस्य सुनील तटकरे समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। अभिनेता जैकी श्रॉफ, मकरंद अनसपुरे, फिल्म निर्माता अनिल शर्मा और साजिद नाडियाडवाला सहित मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

75 साल की उम्र में हुआ निधन

नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया था। वह 75 वर्ष के थे। गोवा के मणिपाल अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अभिनेता डोना पाउला स्थित अपने घर पर बेहोश पाए गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

Nana Patekar Last Rites: पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर, बेटे के नहीं थम  रहे आंसू, भारी मन से सितारों ने दी विदाई - News18 हिंदी

उनके निधन की खबर से फिल्म जगत, प्रशंसकों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। अपनी दमदार अदाकारी, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने दशकों तक भारतीय सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाए रखी।

‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक, यादगार रहा फिल्मी सफर

नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद ‘सलाम बॉम्बे’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। उन्होंने ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘यशवंत’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।

मराठी सिनेमा और थिएटर में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने 1991 में फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। वहीं, ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी में उदय शेट्टी के किरदार में उनके हास्य अभिनय को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। ‘वेलकम बैक’, ‘नटसम्राट’ और ‘द वैक्सीन वॉर’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया।

पद्मश्री और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से हुए सम्मानित

सिनेमा और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नाना पाटेकर को वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। अपने करियर के दौरान उन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किए। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य किरदारों तक, उन्होंने अलग-अलग तरह के अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई।

किसानों और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए भी रहे चर्चित

नाना पाटेकर केवल अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों और खेती-किसानी से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए किए गए उनके प्रयासों ने उन्हें समाज में एक अलग पहचान दिलाई। अभिनेता मकरंद अनसपुरे के साथ उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से भी सामाजिक कार्यों में योगदान दिया।

नाना पाटेकर के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिनकी अदाकारी, संवाद और विशिष्ट व्यक्तित्व लंबे समय तक दर्शकों की यादों में जीवित रहेंगे। पुणे के फार्महाउस में उमड़ी भीड़ और ‘नाना अमर रहें’ के नारों ने उनके प्रति लोगों के गहरे प्रेम और सम्मान को बयां किया।