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नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी की बाढ़ से तबाही, यूपी-बिहार में अलर्ट!

Nepal Flood Alert:   नेपाल के गोरखा जिले में रविवार तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. गंडक नदी पर संभावित असर की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के संबंधित इलाकों में निगरानी की जा रही है. महराजगंज के जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, स्थिति पर 14 घंटे तक विशेष निगरानी के लिए अलर्ट जारी किया गया है.

 
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Maharajganj:  नेपाल के गोरखा जिले में रविवार तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। नेपाल में बाढ़ से तबाही की खबरों के बीच उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर के साथ बिहार के उन इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है, जहां गंडक नदी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

नेपाल में अचानक आई बाढ़ से बिहार में हाई अलर्ट, गंडक नदी से जुड़े जिलों में  विशेष सतर्कता

संभावित खतरे को देखते हुए महराजगंज जिला प्रशासन ने विशेष निगरानी के लिए अलर्ट जारी किया है। नेपाल में सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां बचाव कार्य में जुटी हैं। वहीं, भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल के संबंधित विभागों और राहत आयुक्त कार्यालय के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत में भी बढ़ी चिंता

नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नदी के प्रवाह मार्ग में आई बाधा और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए भारत में भी संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है।

नेपाल से निकलने वाली नदियां उत्तर प्रदेश और बिहार के कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पड़ोसी देश में बाढ़ की स्थिति बनने पर सीमावर्ती जिलों में जलस्तर और नदी के प्रवाह पर निगरानी जरूरी हो जाती है।

हालांकि, भारत के किन इलाकों में कितना असर पड़ेगा, इसकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों की निगरानी और जलस्तर संबंधी आंकड़ों के आधार पर ही हो सकेगी।

महराजगंज में 14 घंटे तक विशेष निगरानी का अलर्ट

महराजगंज के जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि संभावित खतरे को देखते हुए 14 घंटे तक स्थिति पर विशेष निगरानी रखने के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

उन्होंने कहा कि राहत आयुक्त कार्यालय और नेपाल के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है, ताकि नदी की स्थिति में बदलाव होने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।

प्रशासन की प्राथमिकता संभावित बाढ़ के खतरे पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते राहत एवं बचाव की तैयारी सुनिश्चित करना है।

गंडक नदी के किनारे बसे इलाकों पर नजर

बूढ़ी गंडकी नदी नेपाल की सप्तगंडकी नदी प्रणाली की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। इसके प्रवाह और इससे जुड़ी नदी प्रणाली की स्थिति को देखते हुए भारत में गंडक नदी के आसपास के इलाकों की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर के अलावा बिहार के गंडक नदी से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में भी सतर्कता बरती जा रही है। नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि और पानी के बहाव में बदलाव पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल, प्रशासन की ओर से निगरानी और समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों को भी प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों और आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

मनास्लू हिमालयी क्षेत्र से निकलती है बूढ़ी गंडकी

बूढ़ी गंडकी नदी का उद्गम नेपाल के उत्तरी हिमालयी क्षेत्र में मनास्लू पर्वत के ग्लेशियरों के आसपास माना जाता है। मनास्लू पर्वत की ऊंचाई 8,163 मीटर है। यहां से निकलकर नदी दक्षिण दिशा में बहती हुई नेपाल के गोरखा और धादिंग जिलों के बीच से गुजरती है।

करीब 188 किलोमीटर लंबी यह नदी बेनिघाट के पास त्रिशूली नदी में मिलती है। इसके बाद त्रिशूली, कालीगंडकी और अन्य नदियों के संगम से बनने वाला प्रवाह आगे चलकर नारायणी नदी कहलाता है। भारत में प्रवेश करने के बाद इसी नदी प्रणाली को गंडक के नाम से जाना जाता है।

प्रशासन अलर्ट, आगे की स्थिति पर टिकी नजर

नेपाल में बाढ़ की स्थिति के बाद भारतीय प्रशासन नदी के प्रवाह और संभावित प्रभावों पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों के बीच समन्वय के जरिए समय पर जानकारी जुटाने और जरूरत के अनुसार कदम उठाने की तैयारी है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि नेपाल में बाढ़ का असर भारत की ओर नदी के जलस्तर पर कितना पड़ता है। प्रशासन की निगरानी और संबंधित विभागों से मिलने वाली ताजा जानकारी के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।