UPI के नए चार्ज पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, राहुल गांधी ने उठाए सवाल, सरकार ने बताया नियम
National: UPI पर ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू करने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नए नियम के मुताबिक यह शुल्क मर्चेंट से जुड़े लेनदेन पर लागू होगा, जबकि आम ग्राहक से सीधे MDR वसूलने की अनुमति नहीं है। सरकार ने इसे UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम बताया है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इसे UPI पर “टैक्स” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने फैसले को वापस लेने की मांग भी की।
कांग्रेस की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि इस फैसले से अंततः व्यापारियों के जरिए इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंच सकता है। इन आरोपों को केंद्र सरकार ने खारिज किया है।
राहुल ने इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि, "इंदिरा जी से एक बार पूछा गया था कि वे बाएं और झुकती हैं या दायीं ओर. इस पर इंदिरा जी ने कहा कि मैं तनकर खड़ी रहती हूं. लेकिन मोदी का पूरा अलग कॉन्सेप्ट है, वे न तो लेफ्ट हैं और न ही राइट, उन्होंने सीधा डोनाल्ड ट्रंप के सामने सीधे लेट जाने फैसला किया है."
राहुल ने आगे कहा कि मोदी जी ने यूपीआई पर टैक्स लगाकर हरेक भारतीय पर टैक्स लगा दिया है. और अमेरिका को भारी पैसा दे दिया है. मोदी जी कृपया अमेरिका के सामने लेटना बंद करिए, कुछ हिम्मत दिखाइए, खड़े हो जाइए और यूपीआई टैक्स को वापस लीजिए.
Modi ji, roll back the UPI tax. Now. https://t.co/IIt46zMgCG
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 16, 2026
Modi ji, roll back the UPI tax. Now. https://t.co/IIt46zMgCG
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 16, 2026
इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है. मंगलवार को एक एक्स पोस्ट में राहुल ने कहा था कि अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है. इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का 65% इन्हीं में है.
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से.
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने सरकार के फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि UPI को अब तक मुफ्त डिजिटल पेमेंट सिस्टम के तौर पर बढ़ावा दिया गया था। पार्टी नेताओं ने MDR को लागू करने के फैसले को अमेरिकी कंपनियों के हितों से जोड़कर देखा है। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है; सरकार ने ऐसी किसी विदेशी दबाव वाली नीति से इनकार किया है।
BJP/केंद्र सरकार का जवाब क्या है?
सरकार और BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार द्वारा राजस्व के रूप में नहीं वसूला जाएगा। शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संबंधित संस्थाओं के बीच वितरित होगा।
सरकार के मुताबिक, ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा, P2P ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे और छोटे QR-आधारित व्यापारियों के लिए भी छूट का प्रावधान है। साथ ही बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को MDR का बोझ ग्राहक पर डालने से रोकने की बात कही गई है।
असल में नया नियम क्या है?
| UPI लेनदेन | MDR की स्थिति |
|---|---|
| P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति | कोई MDR नहीं |
| ₹2,000 तक P2M | कोई MDR नहीं |
| ₹2,000 से अधिक पात्र P2M | 0.4% MDR |
| ₹75,000 या अधिक के पात्र लेनदेन | अधिकतम ₹300 MDR |
| कुछ आवश्यक सेक्टर | ₹5 फ्लैट MDR |
| छोटे QR मर्चेंट, ₹1 लाख/माह तक | MDR से छूट |
ये नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने हैं।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
राजनीतिक बहस का केंद्र यह है कि क्या MDR का खर्च भविष्य में किसी तरीके से ग्राहक तक पहुंच सकता है। विपक्ष इस संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि ग्राहक से अतिरिक्त UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा और MDR को ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं है।
यानी विवाद “UPI पूरी तरह बंद या महंगा होने” का नहीं, बल्कि बड़े मर्चेंट लेनदेन पर MDR की व्यवस्था, उसके आर्थिक असर और उसके पीछे की नीति को लेकर है।








