Gyanesh Kumar Row: CEC के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन! सड़क से Supreme Court तक घमासान
National: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। सोमवार को दिल्ली, पटना, जयपुर, हैदराबाद, श्रीनगर, कोलकाता, लखनऊ समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। इसी बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गई हैं।

क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद तेज हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असहमति भी शामिल थी।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों के बीच 26 सितंबर को स्पष्ट किया कि पिछले एक साल में लिए गए अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने SIR को लेकर भी अपने फैसलों को सामूहिक निर्णय बताया।
देश के कई शहरों में प्रदर्शन
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सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर अपने हमले तेज़ कर दिए.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में लिखा, "देशभर में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर से वोट चोरी किए जाने और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया."
उन्होंने दावा किया, "मतदाता सूची से 13.30 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. पश्चिम बंगाल के अनुभव को देखते हुए, अगर ये लोग ट्रिब्यूनल में अपील करते हैं, तो 91 फ़ीसदी अपीलों को मंज़ूरी मिलने और उनके नाम मतदाता सूची में बहाल होने की संभावना है."
सोमवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में प्रदर्शन किए। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं बिहार समेत कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
जयपुर, हैदराबाद, कोलकाता, श्रीनगर, पुणे, गुवाहाटी और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में भी विरोध-प्रदर्शन की खबरें सामने आईं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाना शामिल रहा।

कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है।
2 अक्टूबर को जेल भरो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 2 अक्टूबर से जेल भरो आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। संगठन की ओर से कहा गया है कि अगर तय समय तक इस्तीफा नहीं दिया गया तो देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन तेज किया जाएगा।

दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी आयोजकों की ओर से पुलिस को सूचना दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल कुछ मामलों में बिना पूरी सहमति के किया गया।
एक याचिका में क्वो वारंटो (Quo Warranto) की मांग की गई है। इसमें अदालत से यह जांचने का अनुरोध किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने किन संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत कथित तौर पर आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल किया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिका में SIR और उससे जुड़े फैसलों की वैधता को भी चुनौती दी गई है।
एक अन्य याचिका में SIT जांच की मांग
इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य याचिका भी दायर की गई है, जिसमें चुनाव आयोग के ECINet और ERONet सिस्टम से जुड़े डेटा और प्रक्रियाओं की जांच के लिए स्वतंत्र SIT या फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले पूरी आयोग की सहमति के बिना लिए गए। हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की बैठक के बाद कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थागत स्तर पर अलग-अलग राय या विचार-विमर्श को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इसके साथ ही SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों की भी घोषणा की गई है, जिनमें दस्तावेजों के सत्यापन और मतदाताओं तक पहुंचने की प्रक्रिया में बदलाव शामिल हैं।
NDA नेताओं ने किया चुनाव आयोग का बचाव
दूसरी ओर, BJP और NDA से जुड़े नेताओं ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और स्वतंत्र संस्था है तथा SIR से जुड़े फैसले आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग के 26 सितंबर के बयान का हवाला दिया है, जिसमें आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया था।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब सड़क से अदालत तक पहुंच चुका है। एक तरफ विपक्षी दल और विभिन्न संगठन इस्तीफे तथा SIR की प्रक्रिया की समीक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को सामूहिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है।
अब इस पूरे विवाद में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, जहां याचिकाओं में उठाए गए संवैधानिक और कानूनी सवालों पर आगे की कार्यवाही तय होनी है।







