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हरिवंश का तीसरा कार्यकाल तय! रिटायरमेंट डे पर राष्ट्रपति मुर्मू का बड़ा फैसला...

Dy Chairman Of The Rajya Sabha Harivanshh Narayan Singh: जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति मुर्मू ने हरिवंश को अपने कोटे से राज्यसभा सांसद के तौर पर मनोनीत किया है. इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है. राष्ट्रपति कोटे के मनोनयन के बाद उनकी राज्यसभा से विदाई टल गई है. इसका मतलब कि अगले छह सालों तक वे सदन में दिखाई देंगे. बता दें, हरिवंश नारायण सिंह का यह राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल होगा.
 
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Dy Chairman Of The Rajya Sabha Harivanshh Narayan Singh: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का आज शुक्रवार 10 अप्रैल 2026 को सदन के सदस्य के तौर पर कार्यकाल समाप्त हो रहा है. संसद के उच्च सदन की खाली हो रही सीटों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. बता दें, जेडीयू नेता हरिवंश नारायण सिंह को इस बार पार्टी ने राज्यसभा नहीं भेजा है. इस वजह से उनकी सदन से विदाई तय मानी जा रही थी, लेकिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनको कार्यकाल के अंतिम दिन बड़ा गिफ्ट दिया है.

President Droupadi Murmu nominates former Deputy Chairman Harivansh to Rajya  Sabha | DD News On Air

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति मुर्मू ने हरिवंश को अपने कोटे से राज्यसभा सांसद के तौर पर मनोनीत किया है. इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है. राष्ट्रपति कोटे के मनोनयन के बाद उनकी राज्यसभा से विदाई टल गई है. इसका मतलब कि अगले छह सालों तक वे सदन में दिखाई देंगे. बता दें, हरिवंश नारायण सिंह का यह राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल होगा. बता दें, देश के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायरमेंट के बाद खाली हुई सीट पर उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया गया है.

क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला?

  • हरिवंश को संसदीय कार्यवाही का गहरा अनुभव है
  • विपक्ष और सत्ता पक्ष—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम रही
  • राज्यसभा की कार्यवाही को निष्पक्ष और मर्यादित तरीके से संचालित करने के लिए उनकी छवि बनी है

इसी वजह से यह माना जा रहा है कि सरकार और शीर्ष संवैधानिक नेतृत्व निरंतरता और स्थिरता चाहता है.

Congratulations to Sh Harivansh Narayan Singh ji on being elected the Deputy  Chairman of the #RajyaSabha. I am sure the Upper House of Parliament will  benefit from his vast knowledge & rich

संवैधानिक प्रावधान क्या कहते हैं?

संविधान के अनुसार, राज्यसभा उपसभापति की नियुक्ति/कार्यकाल से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति को विशेष अधिकार प्राप्त हैं. उसी अधिकार का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह निर्णय लिया.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

  • सत्तारूढ़ खेमे ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे “अनुभव का सम्मान” बताया
  • विपक्षी दलों की ओर से भी इसे लेकर खुला विरोध सामने नहीं आया, जो अपने आप में खास है
  • संसदीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यह निर्णय राज्यसभा की कार्यकुशलता को मजबूत करेगा

कौन हैं हरिवंश?

  • लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे
  • राज्यसभा में शांत, संतुलित और नियमों के पालन के लिए जाने जाते हैं
  • उपसभापति के रूप में कई कठिन और हंगामेदार सत्रों को सफलतापूर्वक संभाला

आगे क्या?

तीसरे कार्यकाल के साथ हरिवंश पर जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आने वाले समय में

  • विपक्ष–सत्ता के बीच टकराव
  • महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा
  • संसद की गरिमा बनाए रखना

जैसी चुनौतियां उनके सामने होंगी.

रिटायरमेंट के दिन मिला यह फैसला न सिर्फ हरिवंश के लिए व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि यह संकेत भी है कि मौजूदा दौर में अनुभव और संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. तीसरा कार्यकाल इस बात की पुष्टि करता है कि संवैधानिक पदों पर भरोसा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कार्यशैली और निष्पक्षता से तय होता है.