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‘गाली देनी है तो देते रहिए, आपका संस्कार आपको मुबारक’, पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी का पलटवार

UP Politics: उन्होंने कहा कि वह किसी की भाषा या संस्कार का जवाब उसी अंदाज में नहीं देंगे. उपेंद्र तिवारी ने कहा कि उनके लिए उनके माता-पिता, फेफना विधानसभा क्षेत्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और भारतीय जनता पार्टी से मिले संस्कार सबसे महत्वपूर्ण हैं.
 
UTTAR PRADESH

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी ने अपने खिलाफ हो रही टिप्पणियों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वह किसी की भाषा या संस्कार का जवाब उसी अंदाज में नहीं देंगे। उपेंद्र तिवारी ने कहा कि उनके लिए उनके माता-पिता, फेफना विधानसभा क्षेत्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और भारतीय जनता पार्टी से मिले संस्कार सबसे महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के भीतर अलग-अलग दलों और विचारधाराओं से मिले संस्कार हैं और उनकी भाषा व वक्तव्य उनके व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। ऐसे लोगों को वह अपनी ओर से बधाई देते हैं और उनके मन में जो कुछ कहना है, वे कह सकते हैं।

‘जितना गाली देना है, स्वतंत्र हैं’

उपेंद्र तिवारी ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के मन में उनके प्रति नाराजगी है और वह उन्हें गाली देकर अपना मन हल्का करना चाहता है, तो वह इसके लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की भाषा, विचार और व्यक्तित्व उसे मुबारक।

पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ पहले भी उन्हें हटाने और माहौल बनाने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन वह इससे विचलित नहीं हुए। उनका कहना है कि विरोध और आलोचना के बावजूद वह अपने विचार और संस्कार के रास्ते पर कायम हैं।

‘मुझे मेरे मां-बाप और BJP के संस्कार मुबारक’

उपेंद्र तिवारी ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें जो संस्कार दिए हैं, वही उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी से मिले संस्कार के साथ-साथ फेफना विधानसभा क्षेत्र और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मिली सीख भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है।

उन्होंने साफ कहा कि वह दूसरों की भाषा का जवाब देने के लिए अपनी भाषा नहीं बदलेंगे। उनके मुताबिक, परिवार, संगठन और शिक्षा से मिले संस्कार ही उनकी पहचान हैं।

बयान से सियासी चर्चा तेज

उपेंद्र तिवारी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके खिलाफ लगातार बयानबाजी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेकर सीधे जवाब देने के बजाय विरोधियों की भाषा और संस्कार पर निशाना साधा।

उनके बयान को राजनीतिक विरोध के बीच अपनी विचारधारा और व्यक्तिगत मूल्यों पर कायम रहने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यूपी की राजनीति में अब उनके इस बयान पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी नजर रहेगी।