सीमा पर बढ़ी निगरानी से मचा हड़कंप, बांग्लादेशी घुसपैठियों में खौफ, चेकपोस्टों पर लंबी कतारें
Kolkata: पश्चिम बंगाल में कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई ने राज्य की राजनीति और सीमा क्षेत्रों में हलचल बढ़ा दी है. राज्य सरकार की ओर से ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति को लागू करने के संकेत मिलने के बाद सीमा से जुड़े इलाकों में चिंता और अफरातफरी का माहौल देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर ऐसे लोग सीमा की ओर जाते दिखाई दिए, जिन्हें स्थानीय स्तर पर बांग्लादेशी नागरिक बताया जा रहा है. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हो गई हैं.

मंगलवार को उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर और हकीमपुर बॉर्डर इलाके में बड़ी संख्या में लोग एकत्र दिखाई दिए. स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इनमें कई लोग ऐसे थे जो भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर वापस अपने देश लौटने की कोशिश कर रहे थे. भीड़ बढ़ने के बाद सीमा क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा जवानों की तैनाती करनी पड़ी. हकीमपुर चेकपॉइंट पर सुबह से ही पुरुषों और महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को निगरानी में ले लिया. सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भी चौकसी बढ़ा दी है ताकि किसी तरह की अवैध गतिविधि न हो सके.
हाल के दिनों में राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” अभियान को तेज किया है. इसी के तहत मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में कथित अवैध प्रवासियों और रोहिंग्याओं के लिए विशेष होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इन केंद्रों में उन लोगों को रखा जाएगा, जिनकी नागरिकता और दस्तावेजों की जांच पूरी होने तक कानूनी प्रक्रिया चलेगी.
बॉर्डर चेकपोस्टों पर बढ़ी गतिविधियां
उत्तर 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और बांगांव सेक्टर के कई चेकपोस्टों पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) की सतर्कता बढ़ाई गई है. कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश लौटने के लिए सीमा इलाकों में पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर दस्तावेज सत्यापन और बायोमेट्रिक जांच भी तेज कर दी गई है.
SIR और घुसपैठ का मुद्दा बना राजनीतिक केंद्र
राज्य में चल रहे SIR (Special Intensive Revision) अभियान और मतदाता सूची सत्यापन ने भी इस मुद्दे को और गरमा दिया है. विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि वर्षों से अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए थे. वहीं सत्तापक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहा है.
सीमा पर बढ़ाई जा रही सुरक्षा
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई इलाकों में नई फेंसिंग और निगरानी व्यवस्था पर काम शुरू किया गया है. सिलिगुड़ी और उत्तर बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों में BSF को अतिरिक्त जमीन हस्तांतरित की गई है ताकि बॉर्डर फेंसिंग और चौकियों का विस्तार किया जा सके.
रेलवे स्टेशन और ट्रांजिट प्वाइंट भी रडार पर
राज्य सरकार ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस को भी अलर्ट पर रखा है. रेलवे स्टेशनों और ट्रांजिट रूट्स पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी गई है. सरकार का कहना है कि अवैध रूप से प्रवेश करने वालों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी.
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर
इस पूरे घटनाक्रम पर बांग्लादेश ने भी प्रतिक्रिया दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) ने सीमा क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और अवैध सीमा पार गतिविधियों को रोकने के लिए स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों और SIR प्रक्रिया के बीच अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा चुनावी विषय बन सकता है.







