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जंतर-मंतर अब नहीं रहा 'प्रोटेस्ट साइट' गृह मंत्रालय ने किया डिनोटिफाई, जानिए दिल्ली में प्रदर्शन की 3 नई जगहें

जंतर-मंतर को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है. अब जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन नहीं हो सकेगा.
 
जंतर मंतर

जंतर-मंतर को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है. अब जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन नहीं हो सकेगा. यह फैसला गृह मंत्रालय ने लिया है. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से ये फैसला लिया है. धरना-प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने अब तीन नए स्थान चुने हैं. ये तीन स्थान हैं- 1 रामलीला मैदान, 2- बुराडी मैदान और 3- CBD ग्राउंड. 

गृह मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई थी ताकि नागरिक अधिकारों की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों को एक उचित स्थान दिया जा सके, जहां वे प्रदर्शन कर सकें. इस कमेटी की सिफारिश पर जंतर-मंतर को अब प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई कर दिया गया है. यानी कि अब जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट नहीं किया जा सकेगा.

इसके बदले में प्रोटेस्ट के जो नए साइट हैं वे हैं रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड. इन दिनों जगहों पर अब धरना प्रदर्शन और आंदोलन किया जा सकेगा.

हाल-फिलहाल में जंतर मंतर कई ऐतिहासिक आंदोलन का गवाह बना रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना पहला आंदोलन यहीं से किया था, जब एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे. 

वहीं सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा. दिपके ने कहा, "उन्होंने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर हटा दिया है. हां, अब यह विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं रही, क्योंकि इसे युद्ध का मैदान बना दिया गया था. अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा!"

जंतर-मंतर देश के शोषितों, वंचित और हाशिये पर रहे लोगों के लिए विरोध का ऐतिहासिक स्थान रहा है. यहां हाल के इतिहास में कई आंदोलन हुए हैं जिससे देश की राजनीति पर असर पड़ा है. 

वर्ष 2012 में दिल्ली गैंगरेप कांड के बाद निर्भया आंदोलन, 2015 के आस पास वन रैंक-वन पेंशन (OROP) आंदोलन, 2017 में तमिलनाडु किसानों का प्रदर्शन, 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन, CAA के खिलाफ आंदोलन जंतर-मंतर में ही हुआ.