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‘नारी शक्ति वंदन’ पर गूंजा कालकाजी का सभागार: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बुलंद संदेश

 
‘नारी शक्ति वंदन’ पर गूंजा कालकाजी का सभागार: महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बुलंद संदेश
New Delhi: राजधानी दिल्ली के कालकाजी स्थित जिम्स कॉलेज के सभागार में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर एक अहम परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें महिला सशक्तिकरण और राजनीति में उनकी भागीदारी को लेकर जोरदार मंथन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में योगिता सिंह ने शिरकत की और अपने संबोधन से उपस्थित छात्राओं व प्रतिभागियों को प्रेरित किया।

महिलाओं के सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल

अपने संबोधन में योगिता सिंह ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने जानकारी दी कि 16 से 18 अप्रैल तक संसद के दोनों सदनों में इस विषय पर विशेष चर्चा प्रस्तावित है, जिसमें समाज के हर वर्ग खासकर महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है।

यही समय है, सही समय है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “यही समय है, सही समय है”- यह संदेश देश की महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करता है। उन्होंने ‘Women-Led Government’ के संकल्प को सरकार की कार्यशैली का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन रहा है।

छात्राओं से संवाद, नेतृत्व के लिए प्रेरणा

कार्यक्रम के दौरान योगिता सिंह ने छात्राओं और प्रतिभागियों से सीधा संवाद किया और उन्हें राजनीति में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा महिलाएं ही भविष्य की नेता हैं, जिन्हें लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा जैसे मंचों पर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

उन्होंने बताया कि वर्तमान में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी लगभग 10 से 14 प्रतिशत के बीच है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, राजनीति में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति ही समाज में व्यापक बदलाव ला सकती है।

जागरूकता का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रति जागरूकता फैलाने और महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

यह परिचर्चा न सिर्फ एक कार्यक्रम रही, बल्कि महिलाओं के अधिकार, भागीदारी और नेतृत्व को लेकर एक नई सोच और ऊर्जा का मंच भी बन गई।