सपा में फिर हलचल: मुख्य सचेतक पद से कमाल अख्तर का इस्तीफा, पार्टी के भीतर चर्चाएं तेज
Lucknow, UP News: समाजवादी पार्टी (सपा) में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से विधायक और पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) कमाल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद पार्टी के अंदर नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
बोले- राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेश पर दिया इस्तीफा
इस्तीफे के बाद कमाल अख्तर ने कहा कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर यह फैसला लिया है।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय अध्यक्ष हमारे नेता हैं। उनका आदेश मानना हमारा कर्तव्य है। मैंने उनके निर्देश का पालन करते हुए मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया है।”
रुचि वीरा से विवाद की चर्चा
कमाल अख्तर के इस्तीफे के पीछे मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा के साथ चल रहे मतभेदों को भी वजह माना जा रहा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से दोनों नेताओं के बीच संगठनात्मक मुद्दों को लेकर तनातनी चल रही थी। मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंचने के बाद हाल ही में लखनऊ में अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं के साथ बैठक की थी।
अखिलेश यादव ने कराई थी बैठक
बैठक में कमाल अख्तर और रुचि वीरा ने अपनी-अपनी बातें खुलकर रखीं। दोनों पक्षों की शिकायतें सुनने के बाद अखिलेश यादव ने खुद हस्तक्षेप कर मामला शांत कराने की कोशिश की थी।
इस बैठक में राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी, जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव और सांसद प्रतिनिधि खुशनूद अली भी मौजूद थे।
बैठक के बाद माना जा रहा था कि विवाद खत्म हो गया है, लेकिन कमाल अख्तर के इस्तीफे ने एक बार फिर पार्टी के भीतर उठापटक की चर्चाओं को हवा दे दी है।
पिछले साल बने थे मुख्य सचेतक
कमाल अख्तर को 28 जुलाई 2024 को समाजवादी पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया था। यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली थी, जब तत्कालीन मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय ने पद छोड़ दिया था।
मनोज पांडेय ने राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से अलग जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद उन्होंने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके हटने के बाद यह जिम्मेदारी कमाल अख्तर को सौंपी गई थी।
अब किसे मिलेगी जिम्मेदारी?
कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद समाजवादी पार्टी में मुख्य सचेतक का पद एक बार फिर खाली हो गया है। अब पार्टी नेतृत्व इस अहम जिम्मेदारी के लिए किस नेता पर भरोसा जताता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।







