राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बढ़ी कानूनी हलचल, चंपत राय समेत ट्रस्ट पदाधिकारियों पर FIR की मांग; आरोपियों के ठिकानों पर तेज हुई जांच
UP News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने इस प्रकरण में खुलकर हस्तक्षेप करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि गुरुवार दोपहर अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राम जन्मभूमि थाने पहुंचकर नामजद तहरीर देगा और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो अदालत का दरवाजा खटखटाकर एफआईआर दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उनके मुताबिक इस पूरे मामले को लेकर अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी है।
इधर, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ल के ठिकाने से बरामद एक क्यूआर कोड वाले दान बॉक्स ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब यह जांच की जा रही है कि कहीं इस क्यूआर कोड के जरिए किसी अलग खाते में ऑनलाइन चंदा जुटाने या धोखाधड़ी की कोशिश तो नहीं की गई। बताया जा रहा है कि अविनाश पिछले करीब डेढ़ वर्ष से कौशलपुरी फेज-1 स्थित एक योग केंद्र में अपने भाई के साथ रह रहा था। इसी स्थान से कुछ दिन पहले ट्रस्ट के प्रतिनिधि पुलिस की मौजूदगी में दो बैग भी लेकर गए थे।
हालांकि, रामराज्य कोष ट्रस्ट ने इस मामले में सफाई जारी करते हुए कहा है कि उसका राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या चोरी हुए चढ़ावे से कोई संबंध नहीं है। ट्रस्ट का दावा है कि उसका गठन वर्ष 2017 में हुआ था, उसका अलग बैंक खाता है और बरामद दान बॉक्स पर लगा क्यूआर कोड पुराना एवं निष्क्रिय है। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बॉक्स के माध्यम से कोई दान नहीं लिया जाता।
उधर, पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए गिरफ्तार तीन अन्य आरोपियों—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय—के पैतृक घरों पर भी छापेमारी की। जांच टीम ने परिजनों से आरोपियों की आय, हाल के वर्षों में खरीदी गई संपत्तियों और अन्य कीमती सामानों के बारे में पूछताछ की।
लवकुश मिश्रा के घर पुलिस ने गहन तलाशी अभियान चलाया। घर के कमरों के साथ-साथ भूसे के ढेर तक की तलाशी ली गई। पुलिस को आशंका थी कि चोरी की रकम वहां छिपाई गई हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि पहले भी इसी परिसर से उपलों के ढेर में छिपाकर रखी गई नकदी बरामद हुई थी, इसलिए इस बार भी हर संभावित स्थान की बारीकी से जांच की गई।
फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कई नए पहलुओं की ओर बढ़ रही है। पुलिस आर्थिक लेन-देन, संदिग्ध संपत्तियों और बरामद साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है, जबकि बार एसोसिएशन की कानूनी पहल के बाद इस मामले में नया विवाद खड़ा होने की संभावना भी बढ़ गई है।







