संकट के वक्त अकेली पड़ीं ममता बनर्जी, सबसे भरोसेमंद सांसदों ने भी मोड़ा मुंह
West Bengal: कहते हैं ना जब वक़्त अच्छा हो तो सबकुछ अच्छा-अच्छा होता है खासकर राजनीति में. राजनीति न तो बुरी होती है और न ही अच्छी. राजनीति के परिणाम कभी बुरे सावित होते हैं और कभी अच्छे. यदि सफल हुए तो सत्ता सुख भोगोगे, असफल हुए तो कोई रसूखदार से रसूखदार नेताओं के दरबार भी किस तरह सूने पड़ जाते हैं, इसका सबसे जीवंत उदाहरण नयी दिल्ली में देखने को मिला. इसमें कोई दोहराई नहीं कि ममता बनर्जी ने कितने सालों तक सत्ता का सुख भोगा है उसी के विपरीत ये साल उनके के लिए काफी कठिन साबित हो रही है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी जब इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में भाग लेने पहुंचीं, तो जो माहौल था, उसकी कभी दीदी ने कल्पना भी नहीं की होगी.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चारों ओर अचानक सन्नाटा पसरता नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर और बाहर बने मौजूदा संकट के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सबसे करीबी माने जाने वाले सांसद और नेता न तो सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं और न ही दीदी से संपर्क में दिख रहे हैं.
बताया जा रहा है कि कई सांसदों के फोन बंद हैं, तो कुछ पूरी तरह से लो-प्रोफाइल हो गए हैं. जिन नेताओं को ममता बनर्जी का सबसे भरोसेमंद माना जाता था, वही अब संकट की घड़ी में दूरी बनाते नजर आ रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस के जो सांसद कल तक ‘दीदी-दीदी’ कहते नहीं थकते थे, संकट की अंतिम घड़ी में उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से पूरी तरह से दूरी बना ली है. दिल्ली के लुटियंस जोन में टीएमसी के राष्ट्रीय वजूद का पूरी तरह से पतन हो चुका है.

दिल्ली में भी बिखर गया ममता का ‘पावर सिंडिकेट’
दिल्ली पहुंचने के बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बगावत को रोकने के लिए अपने सांसदों से संपर्क साधने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन बदले में उन्हें केवल सन्नाटा मिला. रविवार रात से लेकर सोमवार तक ममता बनर्जी की कोर टीम और कालीघाट के रणनीतिकारों ने टीएमसी सांसदों को फोन किये, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व वाले बागी गुट के अधिकांश सांसदों के फोन या तो स्विच्ड ऑफ (बंद) थे या आउट ऑफ रीच (पहुंच से बाहर).
जिन गिने-चुने सांसदों के फोन चालू भी थे, उन्होंने स्क्रीन पर मुख्यमंत्री आवास या अभिषेक बनर्जी के सचिवालय का नंबर देखते ही या तो कॉल डिस्कनेक्ट कर दी या कॉल को नजरअंदाज (Unanswered Calls) किया. यह पहली बार था, जब दिल्ली में ममता बनर्जी की राजनीतिक कॉल को किसी सांसद ने इस तरह ठुकराने की हिम्मत दिखायी है.
कल तक जो लोग दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही ममता बनर्जी के लिए गुलदस्ते लेकर कतारों में खड़े हो जाते थे, इस बार वे साउथ एवेन्यू और नॉर्थ एवेन्यू (टीएमसी की सत्ता का मुख्य केंद्र) के सरकारी आवासों से गायब रहे. ये तमाम चेहरे दीदी के पास जाने की बजाय चुपके से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शताब्दी रॉय के दिल्ली बंगले पर चल रही बैठक में जा रहे थे. सांसदों की सामूहिक अनुपस्थिति ममता बनर्जी को अंदर तक झकझोर गयी.
अभिषेक बनर्जी के दिल्ली आवास पर मायूसी
ममता बनर्जी दिल्ली प्रवास के दौरान अपने भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दिल्ली आवास पर ठहरीं, लेकिन वहां का माहौल बेहद गमगीन रहा. अभिषेक ने अपने कुछ बेहद वफादार दूतों को बागी सांसदों को मनाने और डिनर पर आमंत्रित करने के लिए भेजा, लेकिन बागी खेमे के रणनीतिकारों ने साफ कह दिया कि अब बहुत देर हो चुकी है. वे एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे.







