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ममता बनर्जी की 15 जून की चिट्ठी और चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा, TMC के अंदरूनी संकट की पूरी कहानी

Kolkata: एक महीने पहले नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) के शनिवार को अचानक इस्तीफे से पार्टी में हड़कंप मच गया. इस दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पार्टी के बड़े नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है.
 
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Kolkata: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 15 जून को चुनाव आयोग को एक अहम पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक विवाद और संगठनात्मक स्थिति पर अपनी चिंताओं को जताया था. यह पत्र तब सामने आया है जब चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे घमासान को और तेज कर दिया है. एक महीने पहले नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) के शनिवार को अचानक इस्तीफे से पार्टी में हड़कंप मच गया. इस दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पार्टी के बड़े नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है.

Chandrima Bhattacharya - Prabhat Khabar

Another setback for Mamata Banerjee: TMC state president Chandrima  Bhattacharya resigns from all posts - The Week

अभिषेक और डेरेक को दीदी ने दिये थे सब अधिकार

खुलासा हुआ है कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 15 जून को ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सचिव अश्विनी मोहाल को एक गोपनीय पत्र लिखा था. पत्र में ममता ने लिखा था कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की ओर से चुनाव आयोग के साथ किसी भी प्रकार के आधिकारिक संवाद, पत्राचार या सांगठनिक फैसलों के लिए केवल 2 नेता राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और संयुक्त सचिव डेरेक ओब्रायन अधिकृत हैं.

ममता बनर्जी ने पत्र में साफ लिखा था कि इन दोनों नेताओं के अलावा पार्टी का कोई भी अन्य पदाधिकारी या सदस्य चुनाव आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का कानूनी या सांगठनिक अधिकार नहीं रखता है.

इस सीक्रेट लेटर के सामने आने के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे की कड़ी को जोड़ा जा रहा है. शनिवार को जब चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपा, तो उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि अब वह ‘भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष टीएमसी के अधिकृत प्रतिनिधि’ (Authorised Person before the ECI) भी नहीं रहेंगी.

ऐसा माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के 15 जून के फैसले से चंद्रिमा भट्टाचार्य आहत थीं. यही वजह है कि 5 जून को प्रदेश अध्यक्ष बनने के महज एक महीने के भीतर ही उन्होंने बैंक खातों के सिग्नेटरी पावर (Authorized Signatory) और चुनाव आयोग के प्रतिनिधित्व सहित सभी सांगठनिक पदों को छोड़ दिया.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब बागी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रीतब्रत बनर्जी ने हाल ही में दिल्ली जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की थी और 58 विधायकों के समर्थन के साथ ‘असली टीएमसी’ होने का दावा किया था. कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी ने यह पत्र इसलिए लिखा था, ताकि बागी धड़ा चुनाव आयोग में कोई समानांतर दावा न ठोक सके. लेकिन दीदी का यह दांव उल्टा पड़ा और चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसी वफादार नेता ने उनका साथ छोड़ दिया.