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SIR में वोटर्स के नाम हटाए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी का प्रदर्शन, मतदाता सूची पर विवाद क्या बदल देगा पश्चिम बंगाल में चुनाव का खेल?

Mamata vs Election Commission: तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख बनर्जी ने कहा, 'मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के भाजपा-निर्वाचन आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई मतदाताओं को गलत तरीके से मृत के रूप में चिह्नित किया गया.
 
Mamata Banerjee

Bengal Election: भारत की संघीय लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव एक नियमित प्रक्रिया है. हर पांच साल के बाद देश में संसदीय चुनाव तो होते ही हैं. इसके अलावा लगभग हर साल किसी न किसी राज्य में विधानसभा चुनावों का आयोजन अब एक रूटीन बन गया है.

West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee protests against the arbitrary deletion of names from the voter list in Kolkata.

इतिहास गवाह है कि यह चुनाव कभी विकास तो कभी सत्तारूढ़ पार्टी के भ्रष्टाचार, कभी जात-पात और संरक्षण और कभी प्याज की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर होते रहे हैं. लेकिन भारतीय लोकतंत्र के लंबे इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब एक विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची के संशोधन के मुद्दे पर होने वाला विवाद ही सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया पर होने वाले विवाद ने तमाम मुद्दों को पीछे छोड़ दिया.

Don't threaten, influence booth officials: Poll body to Trinamool Congress  after meeting over SIR, BLO suicides - India Today

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से कथित तौर पर मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में शुक्रवार (6 मार्च, 2026) को यहां धरना शुरू किया.

कोलकाता में एस्प्लेनेड मेट्रो स्टेशन के निकट धरना शुरू करते हुए बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और निर्वाचन आयोग पर बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें बेनकाब करने की प्रतिबद्धता जताई.

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख बनर्जी ने कहा, 'मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के भाजपा-निर्वाचन आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई मतदाताओं को गलत तरीके से मृत के रूप में चिह्नित किया गया.

ममता बनर्जी ने कहा, 'मैं उन मतदाताओं को इस धरना स्थल पर पेश करूंगी, जिन्हें निर्वाचन आयोग ने मृत घोषित कर दिया है.' ममता बनर्जी ने मध्य कोलकाता में अपराह्न दो बजकर 15 मिनट पर धरना शुरू किया.

धरने की घोषणा तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को की थी. उन्होंने निर्वाचन आयोग पर राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करने का आरोप लगाया था, जिससे विधानसभा चुनावों से महीनों पहले लाखों वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है.

Bengal SIR: Mamata alleges political bias, lack of clarity, administrative  chaos

सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से यह विरोध प्रदर्शन निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर के बाद की मतदाता सूचियों को प्रकाशित करने के कुछ ही दिनों बाद किया जा रहा है, जिसने राज्य के मतदाताओं की संख्या को काफी हद तक बदल दिया है.

राज्य में 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से मतदाताओं की संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है.

इसके अतिरिक्त 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को न्यायिक जांच के अधीन श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी. यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जो निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर चुनावी समीकरणों को बदल सकती है.

 आपको बता दें, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर खुद सुप्रीम कोर्ट में बहस कर चुकी हैं.उन्होंने चुनाव आयोग को बीजेपी का दलाल कहते हुए सीधा टकराव मोल लिया है.