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SIR पर ममता का बड़ा हमला! CEC की गिरफ्तारी की मांग, पुरानी वोटर लिस्ट से फिर चुनाव की मांग

Kolkata:पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR और मतदाता सूची के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ तीखा हमला बोला है. उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करते हुए SIR से पहले की मतदाता सूची बहाल करने और उसके आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की. ममता ने आयोग और भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए.
 
KOLKATA

Kolkata: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग को लेकर अपना हमला तेज कर दिया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करने के साथ ही SIR से पहले की मतदाता सूची बहाल कर उसके आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।

बंगाल में फिर कराओ चुनाव, ज्ञानेश कुमार को करो गिरफ्तार; ममता बनर्जी का  सबसे बड़ा वार, National Hindi News - Hindustan

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब निर्वाचन आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित असहमति की एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां आना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।

ममता बनर्जी के 9 प्रमुख दावे और आरोप

  1. पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से शुरुआत में 58 लाख मतदाता प्रभावित हुए
  2. 27 लाख वोटर्स को बाद में बाहर कर दिया गया.
  3. 7 लाख अन्य नामों को हटा दिया गया.
  4. कुल मिलाकर 92 लाख मतदाताओं को वोट करने से वंचित कर दिया गया.
  5. इस प्रक्रिया में एआई आधारित प्रणाली का इस्तेमाल किया गया.
  6. ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना पर भी गंभीर आरोप लगाये.
  7. ममता बनर्जी की मांग एसआईआर से पहले की मतदाता सूची को बहाल किया जाये.
  8. जिस मतदाता सूची के आधार पर विधानसभा चुनाव कराया गया था, उसकी फिर से समीक्षा की जाये.
  9. दक्षिण 24 परगना जिले के अलीपुर स्थित डीएम कार्यालय में जहां ईवीएम रखी गयी थी, वहीं आग लगी.

इन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग

उप चुनाव आयुक्त

आईटी अधिकारियों

निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों

अन्य लोग

'निर्वाचन आयोग हटाओ, भाजपा हटाओ, CEC हटाओ'

ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव के दौरान निर्वाचन आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक और संघर्ष के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर रहेंगे, तब तक देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। ममता ने उनकी गिरफ्तारी की भी मांग की और कहा कि CEC का पद ऐसे व्यक्ति के लिए नहीं होना चाहिए, जिसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों।

हालांकि, ये ममता बनर्जी के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं; निर्वाचन आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी एक अधिकारी द्वारा एकतरफा निर्णय लिए जाने की बात को खारिज किया है।

पुरानी मतदाता सूची से दोबारा चुनाव की मांग

ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा और निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया और कुछ मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से रोका गया।

उन्होंने SIR से पहले की मतदाता सूची बहाल करने और उन राज्यों में पुरानी मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की, जहां उनके अनुसार मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए।

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग ने हाल में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि करीब 27.16 लाख नाम हटाए गए, जिनमें से 22.21 लाख से अधिक मतदाताओं ने पुनः शामिल किए जाने के लिए अपील की है। आयोग के अनुसार कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं, जिनमें नाम जोड़ने और हटाने दोनों से संबंधित मामले शामिल हैं।

ममता ने गिनाए SIR से जुड़े कई आरोप

ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को लेकर कई दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाता इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए और मतदाता सूची तैयार करने में तकनीक तथा AI आधारित प्रणालियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने SIR से पहले की मतदाता सूची बहाल करने, विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मतदाता सूची की समीक्षा करने और निर्वाचन आयोग के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इनमें निर्वाचन आयोग के आईटी विभाग से जुड़े अधिकारी और निर्वाचक पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

'INDIA' गठबंधन की बैठक जल्द

ममता बनर्जी ने कहा कि इस मुद्दे पर INDIA गठबंधन के सहयोगियों से बातचीत हुई है और जल्द ही गठबंधन की बैठक होगी। उन्होंने राजनीतिक दलों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य लोगों से निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील भी की।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार पर भी कई गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि राज्य में पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में हिंसा और आपराधिक मामले सामने आए हैं। इन दावों को लेकर भी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।

चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

ममता बनर्जी का ताजा बयान द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों पर कई बार आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दोनों आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस के कथित केंद्रीकरण और कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए थे।

इसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने कहा कि रिपोर्ट में कुछ आंतरिक टिप्पणियों को व्यापक निर्णय प्रक्रिया से अलग करके देखा गया है। आयोग के मुताबिक पिछले एक वर्ष में SIR समेत चुनावी सुधारों और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।

इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल में SIR, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। सुप्रीम कोर्ट में भी पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई चल रही है।