Mathura Mystery: मथुरा के इस मोहल्ले में क्यों नहीं रखते करवाचौथ का व्रत? सती के श्राप की रहस्मयी कहानी!
Mathura, UP: करवाचौथ पर जहां देशभर में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं अहोई अष्टमी पर संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के सुरीर कस्बे के वघा मोहल्ले में इन दोनों पर्वों को लेकर एक अलग ही परंपरा प्रचलित है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, यहां के कुछ ठाकुर परिवारों की महिलाएं सदियों से करवाचौथ और अहोई अष्टमी का व्रत नहीं रखती हैं। इसके पीछे एक नवविवाहिता के सती होने और उसके कथित श्राप से जुड़ी लोककथा बताई जाती है।

यह कहानी केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय परिवारों की सामाजिक परंपराओं से भी जुड़ी हुई है। हालांकि, इस कथा और कथित श्राप से जुड़ी घटनाओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि नहीं हुई है।
भैंसे को लेकर हुआ विवाद, युवक की हत्या की कहानी
स्थानीय बुजुर्गों के बीच प्रचलित लोककथा के अनुसार, नौहझील क्षेत्र के रामनगला गांव का एक ब्राह्मण युवक अपनी नवविवाहिता पत्नी को भैंसा-बग्गी से विदा कराकर ससुराल से लौट रहा था। इसी दौरान जब वह सुरीर के वघा मोहल्ले पहुंचा, तो भैंसे को लेकर उसका कुछ ठाकुरों से विवाद हो गया।

कहानी के मुताबिक, मामूली कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और युवक की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना को ही आगे चलकर इलाके में प्रचलित एक खास धार्मिक मान्यता की शुरुआत से जोड़ा जाने लगा।
पति की मौत के बाद सती होने की मान्यता
लोककथा में बताया जाता है कि पति की मौत से दुखी नवविवाहिता ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को श्राप दिया और बाद में अपने पति के साथ सती हो गई। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसी घटना के बाद वघा मोहल्ले के कुछ परिवारों में करवाचौथ और अहोई अष्टमी का व्रत नहीं रखने की परंपरा शुरू हुई।
हालांकि, यह विवरण स्थानीय स्तर पर प्रचलित कथा का हिस्सा है। इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में स्थापित करने वाले स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
असमय मौतों की चर्चा से जुड़ी सती के श्राप की कहानी
स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित एक अन्य मान्यता के अनुसार, कथित घटना के बाद मोहल्ले में कुछ युवकों की असमय मौतें हुईं। इन घटनाओं को लोगों ने सती के कथित श्राप से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। इससे परिवारों में भय और आशंका का माहौल बनने की बात भी लोककथा में कही जाती है।
हालांकि, इन मौतों और कथित श्राप के बीच किसी वास्तविक संबंध की पुष्टि नहीं है। यह संबंध स्थानीय धार्मिक विश्वास और मौखिक परंपरा पर आधारित बताया जाता है।
सती मंदिर से जुड़ी है लोगों की आस्था
ग्रामीणों के अनुसार, अनहोनी की घटनाओं की चर्चा के बीच मोहल्ले में सती मंदिर बनवाया गया, जहां लोग पूजा-अर्चना करने लगे। स्थानीय मान्यता है कि मंदिर बनने के बाद हालात सामान्य हुए और सती मैया के प्रति लोगों की आस्था और गहरी हो गई।
समय के साथ मंदिर इस लोककथा और उससे जुड़ी परंपराओं का अहम हिस्सा बन गया। आज भी स्थानीय लोग इसे श्रद्धा के साथ याद करते हैं।
शादी-विवाह में भी निभाई जाती है परंपरा
वघा मोहल्ले में सती मंदिर का महत्व केवल व्रतों तक सीमित नहीं बताया जाता। स्थानीय लोगों के मुताबिक, शादी-विवाह के दौरान घुड़चढ़ी की रस्म में भी लोग मंदिर पहुंचकर मत्था टेकते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं।
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